ऊर्ध्व पद्मासन योग ( Urdhva Padmasana Yoga )

ऊर्ध्व पद्मासन योग ( Urdhva Padmasana Yoga ) :

ऊर्ध्व पद्मासन योग ( Urdhva Padmasana Yoga in Hindi ) :

  • परिचय :

शीर्षासन का अभ्यास पूर्ण रूप से होने के बाद ही इस आसन को करना चाहिए। शीर्षासन के अभ्यास के बिना इस आसन को करने से गर्दन में मोच या चोट लगने तथा गिरने का डर बना रहता है।

  • ऊर्ध्व पद्मासन की विधि (Urdhva Padmasana Yoga Vidhi) :

आसन का अभ्यास साफ-स्वच्छ, शांत व हवादार स्थान पर करें। आसन के लिए नीचे दरी या चटाई बिछा लें और सिर को रखने के लिए एक गददा रखें जिस पर सिर को रखकर संतुलन बना सकें। अब दोनो हाथों की अंगुलियों को आपस में फंसाकर गददे पर रखें। इसके बाद हथेलियों के बीच में सिर को रख कर धीरे-धीरे शरीर को ऊपर उठाएं। दोनो पैरों को ऊपर सीधा करने के बाद शरीर का संतुलन बनाकर रखें। अब पैरों को मोड़कर ऊपर ही पद्मासन लगाएं। आसन की इस स्थिति में जितने देर सम्भव हो रहें और फिर सामान्य स्थिति में आ जाएं।

  • सावधानी (Urdhva Padmasana Yoga Savdhani) :

शीर्षासन का अभ्यास पूर्ण करने के बाद ही ऊर्ध्व पद्मासन का अभ्यास करना चाहिए। शीर्षासन के अभ्यास के समय शरीर का रक्त सिर में पहुंचने लगता है। इसलिए इस आसन को करने से पहले अन्य आसनों का अभ्यास करना चाहिए। अन्य दूसरे आसनों के अभ्यास के बिना शीर्षासन का अभ्यास करने से शरीर के अन्दर का दूषित रक्त शीर्षासन के समय मस्तिष्क में पहुंचकर हानि हो सकती है ! इसलिए किसी अन्य आसनों के अभ्यास के बिना ऊर्ध्व पद्मासन को नहीं करना चाहिए। ऊर्ध्व पद्मासन या शीर्षासन को करने से पहले सर्वांगासन का अभ्यास करना लाभकारी होता है। किसी अन्य आसनों को करने के बाद ऊर्ध्व पद्मासन करने के बाद शवासन क्रिया जरूर करें।

हृदय के रोगियों को शीर्षासन का अभ्यास नहीं करना चाहिए। 40 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों को सावधानी से इस आसन को करना चाहिए। शीर्षासन का अभ्यास किसी अच्छे योग गुरू की देख-रेख में ही करें।

  • आसन से रोगों में लाभ (Urdhva Padmasana Yoga Labh) :

अध्यात्मिक दृष्टि से यह आसन बहुत महत्त्वपूर्ण है। इस आसन के अभ्यास से शरीर नियंत्रण में बना रहता है। इस आसन से मन शांत व इन्द्रियां वश में रहती है। इससे मन एकाग्र होता है, जिससे मन को अध्यात्मिक विचारों का लाभ होता है। इस आसन से मेरूदंड लचीला बनता है, मांसपेशियां मजबूत बनती है. जिससे व्यक्ति का युवाकाल अधिक समय तक बना रहता है। इस आसन के अभ्यास से अनेक रोग जैसे- बालों का झड़ना, बालों का टूटना आदि दूर होते हैं, याददाश्त तेज होती है। इससे शरीर चमकदार, चेहरा सुन्दर तथा आयु में वृद्धि होती है, आंखों की रोशनी बढ़ती है तथा पाचन तंत्र शक्तिशाली बनता है। ये आसन वीर्य सम्बन्धी दोषों को दूर करता है तथा स्वप्नदोष के विकारों को रोकता है।

  • बुद्ध पदमासन की विधि :

इस आसन का अभ्यास स्वच्छ व साफ हवादार स्थान पर ही करें। इसके अभ्यास के लिए नीचे बैठ कर दाएं पैर को मोड़कर बाएं पैर की जांघ पर रखें और बाएं पैर को मोड़कर दाईं जांघ पर रखें। आसन की इस स्थिति में पैरों की दोनो एड़ियों को बगल में कमर से सटाकर रखें। दाएं हाथ को पीठ के पीछे से लाकर बाएं पैर के पंजे को पकड़े और बाएं हाथ को पीठ के पीछे से लाकर दाएं पैर के पंजे को पकड़े ! आसन की स्थिति में दोनो हाथों से पीछे और दोनों पैरों से आगे क्रॉस का निशान बनाते हुए पूरे शरीर को बांधने जैसा बना लें। अब आंखों को बन्द करके दोनो के बीच में ध्यान को एकाग्र करें। इस अभ्सास को 2 से 5 मिनट तक करें।

  • सावधानी :

इस आसन के अभ्यास की शुरूआत में पैर के पंजे या अंगूठे को पकड़ने में कठिनाई होती है इसलिए इसका अभ्यास धीरे-धीरे करें।

  • आसन से रोगों में लाभ :

इस आसन के अभ्यास से छाती चौड़ी होती है तथा ये आसन थायराइड ग्रंथि को ठीक कर इसके काम को सुचारू करता है। इससे गर्दन, कंधे, पीठ, जांघ तथा टखनों की मांसपेशियां लचकदार बनती है ! यह हृदय को मजबूत करता है, शरीर की दुर्बलता दूर करता है तथा घुटने, कंधे, कमर, पीठ के दर्द को ठीक करता है। बैठकर काम करने से उत्पन्न थकान को दूर करने के लिए यह आसन अधिक लाभकारी है।

Updated: August 17, 2016 — 5:23 am

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Ayurvedic Solution © 2016 Ayurvedic Solution
Copy Protected by Chetan's WP-Copyprotect.