उपविष्टासन योग ( Upvasishta Yoga Ke Labh )

उपविष्टासन योग के लाभ ( Upvasishta Yoga Ke Labh ) :

उपविष्टासन योग के लाभ( Upvasishta Yoga ke Labh in Hindi ) :

  • आसन की विधि (Upvasishta Yoga ki Vidhi) :

Upvasishta Yoga – स्वच्छ-साफ व हवायुक्त स्थान पर नीचे दरी या चटाई बिछाकर उपविष्टासन आसन का अभ्यास करें। आसन के लिए पहले नीचे बैठ जाएं। दोनो पैरों को जितना सम्भव हो दोनो बगल में फैलाएं और दोनो घुटनों को बिल्कुल सीधा रखें। फिर गहरी सांस लेते हुए दाईं ओर झुकते हुए दोनो हाथों से पैरों के पंजों को पकड़ लें। फिर आगे की ओर धीरे-धीरे सिर को झुकाते हुए दाएं घुटने से सिर को टिकाएं और जितनी देर तक सांस को रोकना सम्भव हो रोककर रखें। फिर सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में आ जाएं और सामान्य रूप से सांस लें। अब इस क्रिया को बाईं ओर झुककर करें। इस क्रिया को दोनों तरफ से करने के बाद सांस छोड़ते हुए आगे की ओर झुककर दोनों हाथों को फैलाकर दोनों पैर के पंजों को पकड़ लें और सिर को फर्श से टिकाने की कोशिश करें ! सांस रोकने के क्रम में पहले जितना सम्भव हो रोकें और धीरे-धीरे इसका अभ्यास बढ़ाकर 1 मिनट तक कर दें। इस तरह से इस क्रिया को 2 से 3 बार करें।

  • उपविष्टासन योग सावधानी (Upvasishta Yoga me Savdhani) :

शुरू-शुरू में इस आसन के अभ्यास के समय सिर यदि घुटनो में या सामने की ओर फर्श से टिकाना कठिन हो तो शुरू में जितना सम्भव हो घुटनो से टिकाने की कोशिश करें और धीरे-धीरे इस आसन को पूर्ण करने की कोशिश करें.  इस आसन में पैरों को भी जितना सम्भव हो बगल में फैलाएं।

  • आसन से रोगों में लाभ (Upvasishta Yoga Labh) :

इस आसन के अभ्यास से हाथ व पैर पुष्ट व मजबूत होते हैं तथा पूरे शरीर में स्फूर्ति व ताजगी आती है।

Updated: August 17, 2016 — 5:21 am

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