कैर का अचार और फायदे ( Ker ka Achar aur fayde)

कैर का अचार और फायदे ( Ker ka Achar aur fayde) :

कैर अधिकतर राजस्थान में सभी जगह पर पाया जाता हैं लेकिन रेगिस्थान में ये ज्यादा मिलते हैं। इसके कच्चे कैर, फल और लकड़ी सभी उपयोगी हैं। कैर की झाड़ी की अधिकतम लंबाई 5 से 6 फीट तक होती हैं। इस पर कांटे भी होते हैं. पत्तिया नही होती हैं। कैर में कीड़े या दीमक नही लगती हैं। कैर की आयु अधिक होती हैं। हवन, यज्ञ, दाह संस्कार में कैर की लकड़ी को अच्छा माना जाता हैं। कैर की लकड़ी ठोस और मजबूत होती हैं किसान कैर की लकड़ी को जलने के ईंधन में काम में लेते हैं। Ker ka Achar, चटनी और सब्जी सभी को बहुत अच्छा लगता हैं।

कच्चा और हरा कैर अधिक उपयोगी और काम में लिया जाता हैं। एक साल में दो बार इसके फल आते हैं इसके फल को टीट (Tenti) भी कहते हैं। कैर पकने पर कड़वे से मीठा हो जाता हैं और रंग हरे से लाल हो जाता हैं। कैर में आयरन होने से यह खून की कमी को सही करता हैं। कैर में विटामिन A,B,C भी पाए जाते हैं। कच्चा कैर मधुमेह में फायदेमंद होता हैं। कैर के लाल फूलो की सब्जी भी बड़ी स्वाद बनती हैं। Ker ka achar कब्ज को मिटने वाला और सरलता से पचने वाला हैं।

Ker ka Achar

कैर या टीट का अचार ( Tenti ya Ker ka Achar ) :

टीट को बाजार से लेकर टीट से डंठल को तोड़ कर अलग कर लीजिये पीर टीट को साफ पानी से धो लीजिये. फिर एक चीनी मिट्टी के मटके में पानी भरकर टीट को रख दीजिये फिर 4 से 5 दिन बाद टीट का रंग पीला सा हो जाता है। टीट को निकल कर साफ पानी से धो लें। अब टीट को कुछ देर सूखा लीजिये। पहिए एक कढ़ाई में सरसों का तेल गर्म कर लें और उसे थोड़ा ठंडा होने दे। फिर हलके गर्म तेल में टीट को डाल दे साथ ही अपने स्वादानुसार नमक, लाल मिर्च, हल्दी, हींग, सिरका डाल कर अच्छे से मिला दीजिये। फिर इसे एक कांच या प्लास्टिक के डिब्बे में डाल दे, पर अचार डेट में डूब हुवा होना चाहिए। अब 5 से 6 दिन बाद Ker ka achar खाने के लिए तैयार हो जाता हैं, Ker ka achar बड़ा स्वादिष्ठ लगता हैं।

Updated: January 15, 2017 — 1:20 pm

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