Category: सेक्स और संबंध

मासिक धर्म अधिक होने का उपचार ( Masik Dharm Adhik hone ka Upay )

मासिक धर्म अधिक होने का उपचार ( Masik Dharm Adhik hone ka Upay ) :

मासिक धर्म अधिक होने का उपचार ( Masik Dharm Adhik hone ka Upay ) : Time samay par aane ka ilaj.

  • काली मिट्टी की पट्टी पेट पर बाँधने से, पीपल के पाँच पत्ते रोज तीन बार खाने से एवं बबूल के 5 से 10 ग्राम गोंद का सेवन करने से लाभ होता है।

मासिक पीड़ा का उपचार :

  • कन्यालोहादिवटी की दो-दो गोलियां सुबह-शाम लें।

मासिक धर्म बंद का उपचार ( Masik Dhram Band Ka Upay )

मासिक धर्म बंद का उपचार ( Masik Dhram Band Ka Upay ) :

मासिक धर्म बंद का उपचार ( Masik Dhram Band Ka Upay ) :

  • अरण्डी के पत्तों पर थोड़ा सा अरण्डी का ही थोडा सा गर्म तेल लगाकर पेट पर बाँधने से एवं तिल के 50 मि.ली. काढ़े में सोंठ, काली मिर्च, लेंडीपीपर, हींग और भारंग की जड़ का 3 ग्राम चूर्ण डालकर पीने से लाभ होता है।

मासिक पीड़ा का उपचार (masik pida ke upay) :

  • कन्यालोहादिवटी की दो-दो गोलियां सुबह-शाम लें।

गर्भवती को बेहोशी के उपाय ( Unconsciousness Of A Pregnant Woman )

गर्भवती को बेहोशी के उपाय ( Unconsciousness Of A Pregnant Woman ) :

गर्भवती स्त्री को बेहोशी का रोग के उपाय ( Unconsciousness Of A Pregnant Woman Ke Upay ) :

  • जब गर्भवती स्त्री को बेहोशी के दौरे पड़ने लगे तो उसकी छाती के सारे तंग कपड़े और बटन आदि को खोलकर ढीला कर देना चाहिए और उसके चेहरे पर ठंडे पानी के छींटे मारने चाहिए। इस प्रकार से प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार करने से गर्भवती स्त्री होश में आ जाती है। इस रोग से पीड़ित गर्भवती स्त्री को भोजन में फल तथा दूध का अधिक मात्रा में सेवन करना चाहिए।

स्तन में जलन के उपाय ( Secretion Of Milk From The Breasts )

स्तन में जलन के उपाय ( Secretion Of Milk From The Breasts Ke Upay ) :

दुग्धज्वर तथा स्तन में जलन होने का आयुर्वेदिक और प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार (Secretion Of Milk From The Breasts) : Secretion Of Milk From The Breasts in hindi.

  • इस रोग का उपचार करने के लिए सबसे पहले शिशु से दुग्धपान (दूध पिलाना) करना चाहिए, जिसके फलस्वरूप यह रोग अपने आप ही ठीक हो जाता है।
  • स्तन से दूध को निकालने के लिए रबर पम्प का उपयोग करना चाहिए। इस रबर पम्ब के द्वारा दूध को स्तन से खींचकर बाहर निकाला जाता है जिसके परिणामस्वरूप यह रोग ठीक हो जाता है।
  • इस रोग को ठीक करने के लिए स्त्रियों के स्तनों पर गर्म पानी से सिंकाई करनी चाहिए या फिर उस पर भीगे कपड़े की ठंडी पट्टी का लेप करना चाहिए जिसके फलस्वरूप यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।

डिम्बाशय और जरायु के उपाय ( Inflammation Of The Uterus And ovary)

डिम्बाशय और जरायु के उपाय ( Inflammation Of The Uterus And ovary) :

डिम्बाशय और जरायु का प्रदाह के उपाय ( Inflammation of the uterus and ovary Ke Upay ) :

डिम्बाशय और गर्भाशय के प्रदाह होने का कारण :

  • इस रोग के होने का सबसे प्रमुख कारण कब्ज और पेट में कीड़े हो जाना है।
  • जो स्त्री कई पुरुषों के साथ सहवास करती है उसे भी यह रोग हो जाता है।
  • अप्राकृतिक रूप से मैथुन-क्रिया करने के कारण भी यह रोग स्त्री को हो जाता है।
  • मासिकधर्म सम्बन्धी रोग हो जाने के कारण भी स्त्रियों को यह रोग हो सकता है।

डिम्बाशय और गर्भाशय की प्रदाह होने का आयुर्वेदिक और प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार :

  1. इस रोग का उपचार करने के लिए रोगी स्त्री को सबसे पहले कम से कम 1 बार गर्म और ठंडे जल का डूश (गर्म जल में रुई को भिगोकर योनि में रखना) बारी-बारी से अपने योनि में रखना चाहिए।
  2. रोगी स्त्री को दर्द वाली जगह पर गर्म तथा ठण्डी सिंकाई करनी चाहिए तथा अपने पेड़ू पर मिट्टी की गीली पट्टी करनी चाहिए तथा दिन में 2 बार सुबह और शाम के समय में मेहनस्नान करना चाहिए तथा प्रतिदिन उदरस्नान करना चाहिए। इस प्रकार से प्रतिदिन उपचार करने से कुछ ही दिनों में स्त्री का यह रोग ठीक हो जाता है।
  3. इस रोग से पीड़ित स्त्री को प्रतिदिन अपने भोजन में फल, कच्ची-पकी, साग-सब्जियां, मठा, दही तथा प्राकृतिक खाद्य-पदार्थों का उपयोग करना चाहिए। Inflammation Of The Uterus And ovary.
  4. रोगी स्त्री को प्रतिदिन हल्का व्यायाम करना चाहिए तथा स्वच्छ वायु में टहलना चाहिए तथा सांस की कसरते करनी चाहिए। जिसके फलस्वरूप यह रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है।

योनिद्वार खुजली के उपाय ( Vaginal Inflamation, Itching And Pain )

योनिद्वार खुजली के उपाय ( Vaginal Inflamation, Itching And Pain ) :

योनिद्वार में जलन, खुजली, बदबू आना तथा दर्द का आयुर्वेदिक और प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार (Vaginal Inflamation, Itching And Pain) :

  1. रोगी स्त्री का उपचार करने के लिए सबसे पहले योनि को साफ ठंडे एक लीटर जल में 6 ग्राम फिटकरी तथा नमक या कागजी नींबू का रस मिलाकर धोना चाहिए। जिसके फलस्वरूप रोगी स्त्री को बहुत अधिक आराम मिलता है।
  2. योनि की खुजली ठीक करने के लिए योनि को गरम या ठंडा सेंक बारी-बारी से 15 मिनट तक देने के बाद उस पर गीली मिट्टी की पट्टी करनी चाहिए जिसके फलस्वरूप योनि में खुजली होना तथा दर्द होना बंद हो जाता है।
  3. स्त्रियों को अपने इस रोग को ठीक करने के लिए अपनी योनि में गुनगुने पानी का डूश (गर्म पानी में रुई को भिगोंकर) रखना चाहिए, जिसके फलस्वरूप बहुत अधिक लाभ मिलता है।
  4. स्त्रियों को अपने इस रोग को ठीक करने के लिए प्रतिदिन फलों का रस पीना चाहिए और सुबह तथा शाम के समय में मेहनस्नान करना चाहिए तथा यदि कब्ज की शिकायत हो तो गुनगुने पानी से एनिमा क्रिया करके अपने पेट को साफ करना चाहिए।

मासिक-धर्म रोग के उपाय (Ayurvedic Remedy For Menstrual Disorders)

मासिक-धर्म रोग के उपाय (Ayurvedic Remedy For Menstrual Disorders) :

मासिक-धर्म रोग के उपाय (Ayurvedic Remedy For Menstrual Disorders) : Masik dharm rog ke upay, Masik dharm ka ilaj, Ayurvedic Remedy For Menstrual Disorders in hindi.

मासिक-धर्म संबन्धी रोग के प्रकार :

  • एमेनोरिया : यदि  किसी लड़की को 16 वर्ष की आयु तक मासिकधर्म शुरू न हो तो उसे एमेनोरिया रोग कहते हैं। यदि एक बार मासिकधर्म शुरू हो जाए और फिर बंद हो जाए तो उसे सेकेन्डरी एमेनोरिया कहते हैं।
  • डिस्मेनोरिया : इस प्रकार के मासिकधर्म में जब मासिकधर्म शुरू होता है तो उससे कुछ समय पहले स्त्री के पेट में दर्द होना शुरू हो जाता है।
  • मेट्रोरेजिया : इस रोग के कारण स्त्री को मासिकधर्म सही समय पर नहीं आता है जिसे अनियमित मासिकधर्म कहते हैं।
  • मैनोरेजिया : इस रोग में जब स्त्री का मासिकधर्म शुरू होता है तो उसे नियमित दिनों से अधिक दिनों तक रक्तस्राव होता रहता है।
  • हाईपरमैनोरिया : इस मासिकधर्म में मासिकधर्म तो नियमित होता है लेकिन मासिकधर्म में सामान्य दिनों में ही बहुत अधिक रक्तस्राव होता है। Ayurvedic Remedy For Menstrual Disorders.
  • पोलिमेनोरिया : इस प्रकार का मासिकधर्म स्त्री को 21 दिन से भी कम के अंतरराल पर आता है।
  • मिनोमेट्रोरेजिया : इस प्रकार का मासिकधर्म अनियमित रूप में होता है और इसमें रोगी स्त्री को अधिक रक्तस्राव होता है तथा यह सामान्य से अधिक दिनों तक चलता रहता है।
  • हाइपोमैनोरिया : इस प्रकार का मासिकधर्म सामान्य दिनों तक होता है लेकिन इसमे रक्तस्राव कम होता है।
  • पोस्ट मेनोपाजुअल ब्लीडिंग : इस प्रकार के मासिकधर्म में स्त्रियों को रजोनिवृति (मासिकधर्म का बंद होना) के बाद रक्तस्राव होना शुरू हो जाता है।
  • ब्रेक-थ्रो ब्लीडिंग : इस रोग में स्त्रियों को 2 मासिकधर्मों अर्थात पहला मासिकधर्म समाप्त होने के और दूसरा मासिकधर्म शुरू होने के बीच में रक्तस्राव होता है। यह रोग गर्भनिरोधक गोलियां खाने की वजह से भी हो सकता है।
  • प्री मेन्स्ट्रअल सिन्ड्रोम : यह रोग लगभग 40 प्रतिशत स्त्रियों में पाया जाता है। इस रोग के लक्षण इस प्रकार हैं- सिर में दर्द होना, जी मिचलाना, गुस्सा, थकान, पेट में गैस बनना, कमर में दर्द, अधिक तनाव तथा हाथ-पैरों में सूजन आदि।

मासिकधर्म संबन्धी रोग होने के कारण :

  1. स्त्रियों में मासिकधर्म से संबन्धित रोग गलत तरीके से खान-पान के कारण होता है।
  2. मासिकधर्म शुरू होने पर संभोगक्रिया करने के कारण स्त्रियों को मासिकधर्म संबन्धित रोग हो जाते हैं।
  3. मासिकधर्म के समय कब्ज रहने के कारण भी स्त्रियों को मासिकधर्म संबन्धित रोग हो सकते हैं।
  4. किसी स्त्री की यौन उत्तेजना शांत न होने के कारण भी उसे मासिकधर्म संबन्धित रोग हो सकते हैं।
  5. दूषित पानी का सेवन करने के कारण भी स्त्रियों में मासिकधर्म संबन्धित रोग हो सकते हैं।
  6. स्त्रियों के स्नायु में अधिक कमजोरी आने के कारण भी मासिकधर्म संबन्धित रोग स्त्रियों को हो सकते हैं।
  7. स्त्रियों में हारर्मोन्स संबन्धित रोग हो जाने के कारण भी उसे मासिकधर्म संबन्धित रोग हो सकते हैं। Ayurvedic Remedy For Menstrual Disorders.
  8. स्त्रियों की जननेन्द्रियों में किसी तरह का रोग हो जाने के कारण भी यह रोग हो सकता है।
  9. अधिक मानसिक तनाव तथा अन्य रोगों के कारण भी यह रोग स्त्रियों को हो सकता है।

रजोनिवृति के उपाय ( Ayurvedic Remedy For Menopause )

रजोनिवृति के उपाय ( Ayurvedic Remedy For Menopause ) :

रजोनिवृति के उपाय ( Ayurvedic Remedy For Menopause ) : ayurvedic remedies for menopause symptoms, Ayurvedic Remedy For Menopause in hindi.

रजोनिवृति रोग तीन प्रकार का होता है :

  1. पहला रजोनिवृति रोग वह है जिसमें स्त्री स्वस्थ तो होती है लेकिन बिना किसी परेशानी के उसका मासिकधर्म अचानक बंद हो जाता है व स्त्री को इस बात का पता भी नहीं चलता है।
  2. दूसरा रजोनिवृति रोग वह है जिसमें स्त्री का मासिकधर्म धीरे-धीरे कम होकर बंद हो जाता है।
  3. तीसरा रजोनिवृति रोग वह है जिसमें स्त्री का मासिकधर्म आने का चक्र अनियमित हो जाता है और मासिकधर्म के 2 चक्रों के बीच का अंतर बढ़ जाता है।

रजोनिवृति रोग होने का लक्षण (ayurvedic remedies for menopause symptoms) :

  • जब रजोनिवृति (मासिकधर्म बंद होना) रोग किसी स्त्री को हो जाता है तो उस स्त्री को गर्मी अधिक लगने लगती है तथा उसके शरीर से पसीना निकलने लगता है।
  • इस रोग से पीड़ित स्त्री को नींद पूरी नहीं आती है तथा मानसिक अवसाद हो जाता है।
  • रोगी स्त्री के हृदय की धड़कन बढ़ जाती है तथा उसके हाथ-पैरों पर चीटियां सी रेंगने तथा सुई सी चुभन महसूस होती है।
  • रोगी स्त्री के सिर में दर्द, कान में अजीब-अजीब सी आवाजें आना, जोड़ों में दर्द, कमर में दर्द तथा चिड़चिडा़पन हो जाता है।
  • रजोनिवृति रोग से पीड़ित स्त्रियों की अत:स्रावी ग्रंथियां प्रभावित हो जाती हैं. जिस कारण से उसकी आवाज भारी हो जाती है।
  • रजोनिवृति रोग से पीड़ित स्त्रियों की दाढ़ी-मूंछ उगने लगती हैं तथा स्त्री को मोटापा रोग हो जाता है।
  • पीड़ित स्त्री के बाल झड़ने लगते हैं तथा उसकी त्वचा रूखी हो जाती है और उसे थकावट भी होने लगती है।
  • रजोनिवृति रोग से पीड़ित स्त्री का दिमाग कमजोर हो जाता है तथा उसमें मानसिक एकाग्रता की कमी हो जाती है।

रजोनिवृति रोग का आयुर्वेदिक और प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार (Ayurvedic Remedy For Menopause) :

  1. जब स्त्री को रजोनिवृति रोग हो जाता है तो उसे अपने खान-पान पर विशेष ध्यान देना चाहिए। यदि स्त्री अपने खान-पान तथा दिनचर्या पर विशेष ध्यान देती है तो उसका स्वास्थ्य सही हो जाता है तथा रजोनिवृति हो जाने के बाद भी उसका स्वास्थ्य और सौंदर्य बना रहता है। अपनी सेहत पर अच्छी तरह से ध्यान देने से स्त्रियां कभी-कभी तो पहले से भी ज्यादा अच्छी तथा आकर्षक लगती हैं।
  2. रजोनिवृति रोग होने के समय स्त्रियों की शारीरिक, भावनात्मक और मानसिक स्थिति बड़ी नाजुक होती है। इसलिए परिवार के सदस्यों को तथा खासतौर से पति को पत्नी के साथ सहानुभूति पूर्ण और सहयोगात्मक व्यवहार करना चाहिए।
  3. रजोनिवृति के समय में स्त्रियों की देखभाल सही तरीके से न हुई हो तो उसे गर्भाशय से सम्बंधित रोग हो सकते हैं या फिर स्त्रियों को मानसिक रोग भी हो सकते हैं।
  4. रजोनिवृति रोग होने के लक्षण अधिक होना इस बात को बताते हैं कि रोगी स्त्री के शरीर में विजातीय द्रव्य (दूषित द्रव्य) बहुत अधिक है। इसलिए रोगी स्त्री को प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार कराना चाहिए।
  5. इस रोग से पीड़ित स्त्री को विटामिन `सी´, `डी´, `ई´ तथा कैल्शियम प्रधान भोजन करना चाहिए जिसमें फल, अंकुरित अन्न, सब्जियां, गिरी तथा मेवा अधिक मात्रा में हो। इसके अलावा रोगी स्त्री को फलों का रस अधिक मात्रा में सेवन करना चाहिए। चुकन्दर का रस पीना भी बहुत अधिक लाभदायक होता है लेकिन इसे थोड़ी मात्रा में लेना चाहिए। Ayurvedic Remedy For Menopause.
  6. रजोनिवृति रोग से पीड़ित स्त्री को दूध में तिल मिलाकर प्रतिदिन पीने से रोगी स्त्री को बहुत अधिक लाभ मिलता है।
  7. रोगी स्त्री को दूषित भोजन, मैदा, मिर्च-मसाले तथा चीनी से बनी चीजों का अधिक सेवन नहीं करना चाहिए।
  8. एक गिलास गाय के दूध में एक चम्मच गाजर के बीज डालकर और उबालकर प्रतिदिन पीने से रजोनिवृति रोग ठीक हो जाता है।
  9. यदि रोगी स्त्री के पेट में कब्ज बन रही हो तो उसे अपने पेट पर मिट्टी की गीली पट्टी का लेप करना चाहिए तथा इसके बाद एनिमा क्रिया करके अपने पेट को साफ करना चाहिए।
  10. सुबह के समय में स्त्रियों को सैर के लिए जाना चाहिए तथा कई प्रकार के व्यायाम भी करने चाहिए जैसे तैरना, साईकिल चलाना, घुड़सवारी आदि। Ayurvedic Remedy For Menopause.
  11. रजोनिवृति रोग को ठीक करने के लिए कई प्रकार के योगासन तथा योगक्रियाएं हैं जिनको करने से यह रोग ठीक हो जाता है। ये योगासन तथा योगक्रियाएं इस प्रकार हैं- प्राणायाम, योगमुद्रासन, ध्यान तथा योगनिद्रा आदि।

बांझपन के उपाय ( Banjh pan ka ilaj )

बांझपन के उपाय ( Banjh pan ka ilaj ) :

बांझपन के उपाय ( Ayurvedic Remedy For Sterility ) : Banjh pan ka ilaj, Banjhpan ka karan, Banjhpan ke upay in hindi.

बांझपन के कारण ( Banjhpan ka karan) :

  1. स्त्रियों के प्रजनन अंगों का सही तरह से विकसित न होना।
  2. किसी दुर्घटना या चोट के कारण प्रजनन अंगों में कुछ खराबी आना।
  3. पुरुषों के वीर्य में शुक्राणु का न होना क्योंकि ऐसे पुरुष जब स्त्रियों से संभोग क्रिया करते हैं तो इनके वीर्य में शुक्राणु न होने के कारण स्त्रियों के डिम्ब में शुक्राणु नहीं पहुंचते हैं। इसलिए स्त्री गर्भवती नहीं हो पाती है।
  4. अनियमित मासिकधर्म का रोग होने के कारण भी स्त्री गर्भवती नहीं हो पाती है।
  5. चिंता, तनाव तथा डर आदि के कारण भी स्त्री गर्भवती नहीं हो पाती है।

बांझपन के उपाय ( Banjh pan ka ilaj ) :

  1. स्त्री को गर्भधारण कराने के लिए उसकी योनि के स्नायु स्वस्थ हो इसके लिए स्त्री का सही आहार, उचित श्रम एवं तनाव रहित होना जरूरी है तभी स्त्री गर्भवती हो सकती है इसलिए स्त्री को इस पर अधिक ध्यान देना चाहिए।
  2. स्त्री को गर्भधारण करने के लिए यह भी आवश्यक है कि योनिस्राव क्षारीय होना चाहिए इसलिए स्त्री का भोजन क्षारप्रधान होना चाहिए। इसलिए उसे अधिक मात्रा में अपक्वाहार तथा भिगोई हुई मेवा खानी चाहिए।
  3. इस रोग से पीड़ित स्त्रियों को अपने इस रोग का इलाज करने के लिए सबसे पहले अपने शरीर से विजातीय द्रव्यों को बाहर निकालना चाहिए इसके लिए स्त्री को उपवास रखना चाहिए। इसके बाद उसे 1-2 दिन के बाद कुछ अंतराल पर उपवास करते रहना चाहिए।
  4. इस रोग से पीड़ित स्त्रियों को दूध की बजाए दही का इस्तेमाल करना चाहिए।
  5. स्त्री को गुनगुने पानी में एक चम्मच शहद एवं नींबू का रस मिलाकर पीना चाहिए।
  6. इस रोग से पीड़ित स्त्रियों को ज्यादा नमक, मिर्च-मसाले, तले-भुने खाने वाले पदार्थ, चीनी, चाय, काफी, मैदा आदि चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए। Banjh pan ka ilaj.
  7. इस रोग से पीड़ित स्त्रियों को यदि कब्ज हो तो इसका इलाज तुरंत कराना चाहिए।
  8. बांझपन को दूर करने के लिए स्त्रियों को विटामिन `सी´ तथा `ई´ की मात्रा वाली चीजें जैसे नींबू, संतरा, आंवला, अंकुरित, गेहूं आदि का भोजन में सेवन अधिक करना चाहिए। Banjh pan ka ilaj.
  9. स्त्रियों को सर्दियों में प्रतिदिन 5-6 कली लहसुन चबाकर दूध पीना चाहिए, इससे स्त्रियों का बांझपन जल्दी ही दूर हो जाता है।
  10. जामुन के पत्तों का काढ़ा बनाकर फिर इसको शहद में मिलाकर प्रतिदिन पीने से स्त्रियों को बहुत अधिक लाभ मिलता है।
  11. बड़ (बरगद) के पेड़ की जड़ों को छाया में सुखाकर कूट कर छानकर पाउडर बना लें। फिर स्त्रियां इसे माहवारी समाप्त होने के बाद तीन दिन लगातार रात को दूध के साथ लें। Banjh pan ka ilaj इस क्रिया को तब तक करते रहना चाहिए जब तक की स्त्री गर्भवती न हो जाए।
  12. स्त्री के बांझपन के रोग को ठीक करने के लिए 6 ग्राम सौंफ का चूर्ण घी के साथ तीन महीने तक लेते रहने से स्त्री गर्भधारण करने योग्य हो जाती है।
  13. स्त्री के बांझपन के रोग को ठीक करने के लिए उसके पेड़ू पर मिट्टी की गीली पट्टी करनी चाहिए तथा इसके बाद उसे कटिस्नान कराना चाहिए और कुछ दिनों तक उसे कटि लपेट देना चहिए। Banjh pan ka ilaj इसके बाद स्त्री को गर्म पानी का एनिमा देना चाहिए।
  14. रूई के फाये को फिटकरी में लपेटकर तथा पानी में भिगोकर रात को जब स्त्री सो रही हो तब उसकी योनि में रखें। सुबह के समय में जब इस रूई को निकालेंगे तो इसके चारों ओर दूध की खुरचन की तरह पपड़ी सी जमा होगी। जब तक पपड़ी आनी बंद न हो तब तक इस इस क्रिया को प्रतिदिन दोहराते रहना चाहिए। Banjh pan ka ilaj ऐसा कुछ दिनों तक करने से स्त्री गर्भ धारण करने योग्य हो जाती है फिर इसके बाद स्त्री को पुरुष के साथ संभोग क्रिया करनी चाहिए।
  15. स्त्रियों के बांझपन की समस्या को दूर करने के लिए प्राकृतिक चिकित्सा के अनुसार कई प्रकार के आसन भी हैं, Banjh pan ka ilaj जिनको करने से उनकी बांझपन की समस्या कुछ ही दिनों में दूर हो सकती है।
  16. बांझपन को दूर करने के आसन निम्न हैं- सर्वांगासन, मत्स्यासन, अर्ध मतेन्द्रासन, पश्चिमोत्तानासन, शलभासन आदि।
  17. स्त्री में बांझपन का रोग उसके पति के कारण भी हो सकता है इसलिए स्त्रियों को चाहिए कि वह अपने पति का चेकअप कराके उनका इलाज भी कराएं और Banjh pan ka ilaj फिर अपना भी उपचार कराएं।
  18. यदि स्त्री-पुरुष दोनों में से किसी के भी प्रजनन अंगों में कोई खराबी हो तो उसका तुरंत ही इलाज कराना चाहिए।

दूध पीने के फायदे ( Dudh Pine ke fayde )

दूध पीने के फायदे ( Dudh Pine ke fayde ) :

दूध पीने के फायदे ( Dudh Pine ke fayde ) : Doodh Peene ke fayde, Health Benefits of Milk in Hindi.

Dudh Pine ke fayde

  1. सुबह सिर्फ काढ़े के साथ दूध लिया जा सकता है।
  2. दोपहर में छाछ पीना चाहिए। दही की प्रकृति गर्म होती है, जबकि छाछ की ठंडी।
  3. रात में दूध पीना चाहिए पर बिना शकर के ; हो सके तो गाय का घी १- २ चम्मच दाल के ले . दूध की अपनी प्राकृतिक मिठास होती है वो हम शकर डाल देने के कारण अनुभव ही नहीं कर पाते।
  4. एक बार बच्चें अन्य भोजन लेना शुरू कर दे जैसे रोटी , चावल , सब्जियां तब उन्हें गेंहूँ , चावल और सब्जियों में मौजूद केल्शियम प्राप्त होने लगता है। अब वे केल्शियम के लिए सिर्फ दूध पर निर्भर नहीं।
  5. कपालभाती प्राणायाम और नस्य लेने से बेहतर केशियम एब्ज़ोर्प्शन होता है और केल्शियम , आयरन और विटामिन्स की कमी नहीं हो सकती साथ ही बेहतर शारीरिक और मानसिक विकास होगा।
  6. दूध के साथ कभी भी नमकीन या खट्टे पदार्थ ना ले, त्वचा विकार हो सकते है। Dudh Pine ke fayde.
  7. बोर्नविटा , कॉम्प्लान या होर्लिक्स किसी भी प्राकृतिक आहार से अच्छे नहीं हो सकते। इनके लुभावने विज्ञापनों का कभी भरोसा मत करिए, बच्चों को खूब चने , दाने , सत्तू , मिक्स्ड आटे के लड्डू खिलाइए।
  8. प्रयत्न करे की देशी गाय का दूध ले, जर्सी या दोगली गाय से भैंस का दूध बेहतर है।
  9. दही अगर खट्टा हो गया हो तो भी दूध और दही ना मिलाये , खीर और कढ़ी एक साथ ना खाए . खीर के साथ नामकी पदार्थ ना खाए। Dudh Pine ke fayde.
  10. अधजमे दही का सेवन ना करे, रात में दही या छाछ का सेवन ना करे।
  11. चावल में दूध के साथ नमक ना डाले।
  12. सूप में ,आटा भिगोने के लिए दूध इस्तेमाल ना करे। Dudh Pine ke fayde.
  13. द्विदल यानी की दालों के साथ दही का सेवन विरुद्ध आहार माना जाता है, अगर करना ही पड़े तो दही को हिंग जीरा की बघार दे कर उसकी प्रकृति बदल लें।

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