Category: गर्भावस्था और परवरिश

प्रसूताज्वर के उपाय ( Ayurvedic Remedy For Puerperal Fever ) Sutika

प्रसूताज्वर के उपाय ( Ayurvedic Remedy For Puerperal Fever ) :

प्रसूताज्वर के उपाय ( Ayurvedic Remedy For Puerperal Fever ) : Sutika rog ka ilaj, Ayurvedic Remedy For Puerperal Fever in hindi.

प्रसूताज्वर ( सूतिका रोग ) होने के कारण :

  1. यह रोग उन स्त्रियों को होता है जो गर्भावस्था (गर्भकाल के दौरान) के समय में गर्भावस्था के नियमों का सही तरीके से पालन नहीं करती है या फिर यह रोग उन स्त्रियों को होता है जिनके शरीर में बच्चे को जन्म देने के बाद, रोग को उत्तेजना देने के लिए कुछ मात्रा में विजातीय द्रव्य (दूषित मल) शेष रह गया होता है।
  2. यह रोग उन स्त्रियों को भी हो जाता है जो प्रसवावस्था (बच्चे को जन्म देने के समय) में चलने-फिरने की क्रिया करती है।
  3. यह रोग उन स्त्रियों को भी हो जाता है जिन स्त्रियों का प्रसव के तुरंत बाद रक्तस्राव बंद हो जाता है।
  4. अधिक ठंडी वायु लग जाने कारण भी यह रोग स्त्रियों को हो जाता है।
  5. अधिक ठंडे जल का प्रयोग करने के कारण भी सूतिका रोग स्त्रियों को हो जाता है।
  6. प्रसव के बाद गर्भाशय में किसी प्रकार के मल के रुक जाने या फिर गर्भाशय में घाव हो जाने भी यह रोग हो सकता है।
  7. सूतिका रोग उन स्त्रियों को भी हो जाता है जो बच्चे को जन्म देने के बाद अधिक यात्रा करती है तथा मल-मूत्र त्याग के वेग को रोकती है।

प्रसूताज्वर (सूतिका रोग) का आयुर्वेदिव और प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार :

  • इस रोग को ठीक करने के लिए 15 से 30 मिनट के लिए पीड़ित स्त्री को प्रतिदिन 4 बार मेहनस्नान करना चाहिए।
  • सूतिका रोग से पीड़ित स्त्री यदि अधिक कमजोर हो तो उसे मेहनस्नान ठंडे पानी से नहीं कराना चाहिए बल्कि थोड़ा गुनगुना पानी से करनी चाहिए।
  • यदि सूतिका रोग से पीड़ित स्त्री की अवस्था साधारण है तो उसे प्रतिदिन 2 बार मेहनस्नान करनी चाहिए तथा इसके बाद अपने पेडू (नाभि से थोड़ा नीचे का भाग) पर गीली मिट्टी का लेप करना चाहिए। Ayurvedic Remedy For Puerperal Fever.
  • सूतिका रोग से पीड़ित स्त्री को पीले रंग की बोतल का सूर्यतप्त जल 2 भाग और गहरे नीले रंग की बोतल का सूर्यतप्त जल 1 भाग लेकर, इसे आपस में मिलाकर तथा फिर इसमें से लगभग 25 मिलीलीटर की प्रति मात्रानुसार प्रतिदिन 6 बार सेवन करने से स्त्री को बहुत अधिक लाभ मिलता है और उसका यह रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है।

गर्भवती महिला के उपचार ( Garbhwati Mahila Ke Upchar )

गर्भवती महिला के उपचार ( Garbhwati Mahila Ke Upchar ) :

गर्भवती महिला के उपचार ( Garbhwati Mahila Ke Upchar ) : Garbhwati Mahila ka gharelu ilaj, Garbhwati Mahila ka gharelu upay.

1) किसी भी तरह की उल्टी हो रही हो या जी मिचलाता हो तो सूखा धनिया या हरा धनिया कूट-पीस कर निचोड़ कर तरल तैयार कर लें। 5-5 चम्मच तरल बार – बार देते रहें इससे उल्टी रुक सकती है। गर्भवती की उल्टी के लिए भी यह उपाय सफल रहता है।

2) चार नींबू का रस निकाल कर छान लें। 50 ग्राम सैंधा नमक डालें और 125 ग्राम जीरा रस में भिगो दें। धीरे -धीरे जब रस पूरी तरह सूख जाए और सिर्फ जीरा रह जाये तो इसे कांच या प्लास्टिक की शीशी में भरकर रख लें। जब उल्टी आती हो तब इसे आधी चम्मच मात्रा में मुहं में चूसें | उल्टी काबू में आ जाती है।

3) अदरक व प्याज का रस दो-दो चम्मच पिलाने से उल्टी होना बंद हो जाती है।

4) बार-बार उल्टी होना रोकने के लिए बर्फ चूसना हितकारी उपचार है।

5) तुलसी के पत्ते पीसकर रस निकालें। इसके सेवन से उल्टी बंद होती है और पेट के कृमि भी मर जाते हैं।

6) तुलसी के पत्ते के रस में शहद मिलाकर चाटने से लाभ मिलता है | (Garbhwati Mahila Ke Upchar).

7) पित्त की उल्टी होती हो तो शहद और दालचीनी मिलाकर चाटना कर्त्तव्य है।

8) दो लौंग पानी में उबालकर पियें। उल्टी में हितकारी असर होता है। लौंग चबाकर भी खाया जा सकता है।

9) गर्भवती स्त्री भुने चने का सत्तू पानी में पतला घोल बनाकर, नमक शकर मिलाकर पीये तो उल्टी की समस्या दूर होती है।

10) यात्रा के दौरान खान पान की गडबडी से उल्टी आती हो तो लहसुन की कली चबाने से लाभ मिलता है।

11) जी मिचलाने पर प्याज काटें उसमें नींबू रस और काला नमक मिलाकर खाना चाहिए।

12) गर्भवती स्त्री को गाजर का रस बराबर पिलाते रहें। इससे केल्शियम की कमी नहीं होगी तथा रक्त में हीमोग्लोबिन का उचित स्तर कायम रहेगा। (Garbhwati Mahila Ke Upchar).

13) कच्चे टमाटर के रस में शहद मिलाकर देना चाहिए, इससे गर्भिणी एनीमिया की शिकार नहीं होगी | इससे भूख भी बढ़ती है ।

14) गर्भिणी को खाना खाने के बाद थौड़ी अजवाइन जरूर लेना चाहिए। इससे मिचली नहीं होती और खाना ठीक से हजम होता है ।

15) दैनिक आहार में हरी सब्जिया लेना स्वास्थ्यकारी रहता है, इससे आयरन की पूर्ति होती है ।

16) हर्रे को पीसकर शहद के साथ चाटें, उल्टी बंद करने का अच्छा उपाय है | (Garbhwati Mahila Ke Upchar).

17) पूरे गर्भ काल में दस मिली सौंफ का अर्क पीते रहना चाहिए, इससे गर्भपात की संभावना नहीं रहती है।

18) गर्भिणी को आँवला किसी भी रूप लेना हिकार है | आंवला शरीर को एक अंडे से भी ज्यादा शक्ति, स्फूर्ति, बल देता है।

19) एक कप कच्चे दूध में एक चुटकी पीसी फिटकरी डालकर पीने से गर्भ गिरना रुक जाता है।

20) गर्भिणी को नारियल गोला और मिश्री का उपयोग करना चाहिए | इससे प्रसव आसानी से होता है।

21) जिस स्त्री को बार-बार गर्भ गिर जाता है वह गर्भावस्था में सिंघाड़े खाए तो गर्भपात से निजात मिलेगी।

22) यदि गर्भिणी को उल्टियां अधिक हो रही हों तो राई को पीसकर पेट पर मल मल का कपड़ा रखकर लेप करें पन्द्र मिनिट तक रहने दें | उल्टियां बंद हो जायेंगी | (Garbhwati Mahila Ke Upchar).

23) गर्भावस्था में छाछ पीना लाभदायक है।

24) जी मिचलाना अखरोट खाने से भी ठीक हो जाता है।

2 5) गर्भिणी को चुकंदर का रस सेवन करते रहना हितकर है | इससे रक्त बढ़ता है और स्तनों में दूध की मात्रा बढ़ती है।

गर्भ धारण करने के उपाय (Garbh dharan ke gharelu upay )

गर्भ धारण करने के उपाय ( garbh dharan ke gharelu upay ) :

गर्भ धारण करने के उपाय ( garbh dharan ke gharelu upay ) : garbh dharan karne ke ayurvedic upay tarika.

  1. एक चम्मच असगंध का चूर्ण , एक चम्मच देशी घी के साथ मिलाकर मिश्री मिले हुए दूध के साथ मासिक धर्म के छठे दिन से पुरे माह पीने से बंध्यापन दूर होकर गर्भधारण होता है ! यह प्रयोग सुबह खाली पेट प्रयोग करना चाहिए और जब तक लाभ ना हो तब तक दोहराते रहना चाहिए।
  2. अपामार्ग की जड़ का चूर्ण एक चम्मच की मात्रा में दूध के साथ ऋतुकाल के बाद 21 दिनों तक सेवन करने से गर्भ धारण होता है।
  3. अशोक के फूल दही के साथ नियमित रूप से सेवन करते रहने से भी गर्भ स्थापित होता है।
  4. नीलकमल का चूर्ण और धाय (धातकी) के पुष्पों का चूर्ण समभाग मिलाकर ऋतुकाल प्रारम्भ होने के दिन से 4 दिनों तक नियमित रूप से एक चम्मच चूर्ण शहद के साथ सेवन करने से गर्भधारण होता है ! प्रयोग असफल होने अगले ऋतुकाल से पुनः दोहराए। (Garbh dharan ke gharelu upay).
  5. पीपल के सूखे फलों का चूर्ण आधे चम्मच की मात्रा में कच्चे दूध के साथ मासिक धर्म शुरू होने के पांचवें दिन से दो हफ्ते तक सुबह शाम प्रयोग करने से गर्भधारण होता है ! लाभ नहीं होने से अगले महीने भी इसको जारी रखें।

आयुर्वेदिक फास्टफ़ूड ( Ayurvedic Fast Food )

आयुर्वेदिक फास्टफ़ूड ( Ayurvedic Fast Food in Hindi ) :

आयुर्वेदिक फास्टफ़ूड खाएं स्वस्थ सेहत बनाएं (Ayurvedic Fast Food) :

आधुनिक जीवन शैली के तहत लोग अपने आहार के प्रति उतने सजग नहीं है इसमें वे भोजन का समय एवं पोषण मूल्यों का ध्यान रख सकें परिणाम स्वरुप झटपट भोजन (फास्ट फ़ूड ) के परिणाम भुगतने पड़ते है इसमें एसिडिटी, कब्जियत आदि शामिल है भोजन में महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना आवश्यक है ।

भोजन करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना भी आवश्यक है :-

  • भोजन के पूर्व हाथ आदि की स्वच्छता का भी ध्यान रखें भोजन करते समय बोलना या पुस्तक पढ़ना आदि कार्य न करें ।
  • भोजन के समय उपयुक्त आसन का प्रयोग करना चाहिए खड़े-खड़े या चलते-चलते भोजन करना पशु ब्रितिवत   है ।
  • भोजन के समय चित्त शांत एवं एकाग्र होना चाहिए इससे एन्जाइम्स का स्राव ठीक से होता है ।
  • समय पर भोजन करें समय से अधिक पूर्व या समय के बाद भोजन करना सामान्य क्षुधा प्रवृत्ति को नष्ट करता है इससे अरुचि , एसिडिटी प्रभृति रोग उत्पन्न होते है ।

आयुर्वेद में अनेक आहार व्यंजन (Ayurvedic Fast Food) का वर्णन है जिसे हम फास्ट फ़ूड के रूप में प्रयोग कर सकते है या उसे हम आयुर्वेदिक फास्ट फ़ूड (Ayurvedic Fast Food) कहें तो अतिश्यक्ति नहीं होगी यह फास्ट फ़ूड शरीर को पोषण प्रदान करने के साथ-साथ स्वस्थ वर्धक भी है ।

Ayurvedic Fast Food

धाना (कार्न) :-

  • धान, जौ, आदि को भूनकर धाना बनाता है ( वर्तमान में केलाग्स कार्न फ्लेक्स इसका एक प्रकार है जो मक्के से निर्मित होता है ) आयुर्वेद में धान या जौ से निर्मित धाना अधिक गुणकारी है इसमें दूध एवं शक्कर मिलाकर सेवन करने पर यह शरीर के बल को बढ़ाता है पचने में हल्का व पोषण प्रदान करता है अत: इसका प्रयोग नाश्ते के रूप में किया जा सकता है पोषण के अतिरिक्त यह कंठ , नेत्र के रोग ,उलटी दस्त होने पर अच्छे भोजन का विकल्प है इससे रोग को नियंत्रण करने में भी मदद मिलती है ।

सत्तू :-

  • धान, चना, जौ आदि धान्यों को भूनने व पीसने पर वह सत्तू कहलाता है यह फास्ट फ़ूड (Ayurvedic Fast Food) का अच्छा विकल्प है सत्तू में थोड़ी मात्रा में घी एवं शक्कर मिलाकर पानी डालकर पेस्ट बनाकर खाने पर यह तुरंत शरीर में बल प्रदान करता है यह सत्तू की विशेषता है सत्तू में सेहद मिलाकर सेवन करने पर मोटापा, एवं केवल पानी मिलाकर सेवन करना मधुमेही रोगी का आदर्श भोजन है गर्मी में सत्तू का प्रयोग प्यास को भी कम करता है एवं बलदायक है सत्तू सेवन के भी निर्देश है जिसे जानकर प्रयोग करना चाहिए ।

पृथुडा (चिवडा) :-

  • चावल जौ को भिगोकर भुन लेने पर यह पृथुडा कहलाता है वर्तमान समय में प्रचलित पोहा भी इसी प्रकार है. इसको पानी में भिगोकर दूध एवं शर्करा डालकर सेवन करने पर यह स्निग्ध मलभेदक एवं वातशामक है ।

कुल्माषा (घुघरी) :-

  • गेहूं चना मुंग आदि अन्न को उबालकर उसमे सरसों का तेल डालकर सेंक लें एवं नमक डालें यह कुल्माषा है. यह भी फास्ट फ़ूड (Ayurvedic Fast Food) का विकल्प है कुल्माषा गुरु, लघु, व मल का भेदन करता है. जिन द्रव्यों से यह बनाया जाता है उस द्रव्य के गुणों से युक्त होता है जैसे मुंग से बनाने पर पचने में हलकी व उड़द से बनी कुलामाषा गुरु होती है ।

लप्सिका (लपसी) :-

  • बारीक़ गेहूं के आटे को हल्का भुन लें व उसमे मात्रानुसार शर्करा एवं दूध डालकर पकाएं उसे उतारकर उसमे लौंग, चूर्ण, काली मिर्च एवं इलायची चूर्ण डाले यह लप्सिका है ।

पिंडारी (इडली ) :-

  • पिंडरी आयुर्वेद में वर्णित है उड़द एवं मुंग की पिठी बनाकर उसमे नमक हिंग अदरख व जीरा मिलाकर पिंडाकार बनाकर भाप में पकाएं एवं घी में तल लें इसे सुखा या इमली की चटनी में खाया जा सकता है. यह बलकारक क्षुदा शांत करने वाली शुक्र बढ़ाने वाली एवं रोचक है ।

कुंडलनी (जलेवी ) -:

  • मालवा का प्रसिद्ध खाद्य पदार्थ व्यंजन है दूध के साथ जलेवी का प्रयोग बलकारक पोषक एवं तर्पक है. इस तरह के आयुर्वेदिक एवं भारतीय व्यंजन फास्ट फ़ूड (Ayurvedic Fast Food) का बेहतर विकल्प है एवं शरीर के लिए फस्ट फ़ूड की तरह हानिकारक न होकर लाभदायक होते है ।

गर्भावस्था में आहार ( Garbhavastha me Aahar )

गर्भावस्था में आहार ( Garbhavastha me Aahar ) :

गर्भावस्था में आहार ( Garbhavastha me Aahar in Hindi ) :

Garbhavastha me Aahar. – गर्भावस्था के दौरान आप अच्छा खाना खाये, जिससे आपको सभी पोषक तत्व, विटामिन, फाइबर और खनिज मिल सकें। रोज एक गिलास दूध जरूर पिएं। गर्भवती महिला को अधिक कैलोरी की जरुरत होती हैं। यदि गर्भावस्था में आपका वजन बढ़ रहा है तो तो चिंता नहीं करें। आयुर्वेद आहार को 3 श्रेणियों सात्विक, राजसिक, और तामसिक में बांटा जाता है। सात्विक आहार ताजा और पौष्टिक होता है, राजसिक आहार ऊर्जावान, और तामसिक आहार कुछ हद तक भारी और सुस्त होता है। इन सब में से सात्विक भोजन गर्भावस्था के दौरान सबसे अच्छा आयुर्वेदिक आहार माना जाता है।

Garbhavastha me Aahar

गर्भावस्था में आयुर्वेदिक आहार ( Garbhavastha me Aahar ) :

  1. आयुर्वेद के अनुसार, गर्भधारण से पहले कम से कम 3 महीने तक सात्विक आहार करना चाहिए। इस आहार को ताजा फल आड़ू, आम और नारियल के रूप में मिलाकर करना चाहिए।
  2. गर्भावस्था के दौरान आयुर्वेद आहार में बासमती चावल को बेहतर विकल्प के तौर पर देखा जाता है। मीठे आलू, अंकुरित अनाज और स्क्वैश सब्जियां उनके उच्च पोषण के महत्व की वजह से सूची से बाहर नहीं रह सकते।
  3. मां बनने जा रही महिला तरल या घी के साथ या दूध के साथ मिश्रित चावल खा सकती है। मछली एक गर्भवती महिला के लिए स्वस्थ आहार है। लेकिन लाल मांस खाने से बचना चाहिए। इसे भी पढ़े- (गर्भावस्‍था में न लेने योग्‍य आहार)
  4. हर सुबह एक गिलास फलों का ताजा रस पीना चाहिए।
  5. दलिया और अनाज खाएं।
  6. गर्भावस्था के दौरान आयुर्वेदिक आहार में विटामिन सी भी आता है। जो माँ और बच्चे दोनों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। गाजर, टमाटर में प्रचुर मात्रा में विटामिन सी होता है। इसलिए दोपहर के भोजन में इसे शामिल (Garbhavastha me Aahar) करें।
  7. भ्रूण के विकास के बारे में बात करे, तो गर्भावस्था के पहले तीन महीने अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं। भ्रूण के विकास के लिए दूध और पानी, नारियल पानी और फलों के रस जरूर पिएं।
  8. 7 महीने के दौरान नमक और वसा की मात्रा को कम करना आवश्यक है।
  9. आयुर्वेद आहार में गेहूं, राई, जई, अंकुरित, सेम, मसूर, रोटी, सोया सेम, और सूखे मटर आते है.  इन खाद्य पदार्थों में प्रोटीन का खजाना होता है, और गर्भावस्था के लिए एकदम सही आयुर्वेदिक आहार है। आलू, पालक, बादाम, अंजीर, अंगूर और सूखे मेवे भी एक भ्रूण के लिए अच्छे आहार है।
    गर्भावस्था आहार का सही चयन वास्तव में बच्चे के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का फैसला करता हैं। इस समय के दौरान स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होना बहुत जरूरी है। और इस दौरान आप आयुर्वेदिक गर्भावस्था आहार पर पूरा विश्वास कर सकती हैं।

जवान रहने के उपाय ( Young Living Ke Upay )

असमय आनेवाले वृद्धत्व को रोकने के उपाय (Young Living Ke Upay) :

युवा रहना और जवान दिखना हर किसी का सपना होता हैं। हर कोई अपनी उम्र को छुपाना चाहता हैं। हर कोई यही चाहता हैं की वो हमेशा सुन्दर और जवान बन रह सके। आप अपनी सेहत की तरफ थोड़ा ध्यान देकर और अपनी रोज की आदतों में थोड़ा सा बदलाव करके आप लम्बे समय तक सुन्दर और जवान बने रह सकते हैं। हम आपको जवान बने रहने के Jawan Rehne Ke Upay, Young Living Ke Upay और swasth rehne ke upay कुछ घरेलु उपाय बताते हैं-

Young Living Ke Upay

Young Living Ke Upay aur Javan rahne ke upay in hindi :

  • त्रिफला एवं मुलहठी के चूर्ण के समभाग मिश्रण में से 1 तोला चूर्ण दिन में दो बार खाने से असमय आनेवाला वृद्धत्व रुक जाता है।
  • आँवले एवं काले तिल को बराबर मात्रा में लेकर उसका 1 से 2 ग्राम बारीक चूर्ण घी या शहद के साथ लेने से असमय आने वाला बुढ़ापा दूर होता है एवं शक्ति आती है।
  • अपने शरीर को स्वस्थ्य और जवान रखने के लिए नियमित रूप से योग और व्यायाम करना बहुत जरुरी हैं, इससे मोटापा भी कम होता हैं और शरीर में ताजगी बानी रही हैं साथ ही बीमारियां दूर रहती हैं।
  • हमें देर रत तक नहीं जगना चाहिए। सही समय पर सोना और अपनी नींद पूरी करनी चाहिए, यह apke स्वास्थय के लिए जररी हैं।
  • धूम्रपान करने या सिगरेट पीने से उम्र तेजी से कम होती हैं, और अनेक बीमारियों को जन्म देते हैं। शराब का सेवन भी बहुत कम करना चाहिए। क्योंकि जवान रहने के लिए स्वस्थय रहना जरुरी हैं.
  • जंक-फूड का सेवन कम करे, इससे मोटापा जल्दी आता हैं और अनेक बीमारियों को निमंत्रण मिलता हैं। आप अपने खाने पीने में शुगर की मात्रा कम रखें।
  • सबसे जररी हैं की आप तनाव या टेंशन से दूर रहे। आप पीठ के बल सोने की आदत डालें। उल्टा न सोये।
  • पानी शरीर और त्वचा के लिए बहुत उपयोगी हैं, इसलिए पानी खूब पिये। क्योंकि पानी कम पीने से अनेक बीमारियां जन्म ले लेती हैं.
  • जवान रहने के लिए आप कद्दू का सेवन, किवी फल का सेवन, डार्क चॉकलेट खाये। साथ ही आप जैतून के तेल को खाये या फिर त्वचा पर लगा सकते हैं।
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