Category: ज्योतिष ज्ञान और उपाय

मिथुन राशिफल 2017 ( Mithun Rashifal 2017 )

मिथुन राशिफल 2017 ( Mithun Rashifal 2017 ) :

मिथुन राशि वाले व्यक्तियों के नाम का, की, कु, घ, छ, के, ङ, को, हा से शुरू होते हैं। Mithun Rashifal 2017 के अनुसार आपकी पारिवारिक स्थिति बहुत अच्छी रहेगी। आपकी माता की तरफ से आपको पूरा सहयोग मिलेगा। आप किसी भी प्रकार के वाद-विवाद से दूर रहने का प्रयास करे। आपके परिवार में ख़ुशी का माहौल रहेगा। इस साल के शुरू में आपको आपके काम के हिसाब से लाभ कम मिलेगा। पर आप पूरी मेहनत से काम करते रहे इस साल की अंतिम तिमाही में आपके व्यापार में उन्नति होगी। इस वर्ष के अन्त तक आपके सभी काम सफल हो जायेगे।

शारीरिक स्वास्थ्य ( Mithun Rashifal 2017 ke anusar Health ) :

Mithun Rashifal 2017 के अनुसार अपने स्वास्थ्य पर ध्यान नही देने से बिगड़ सकता हैं। आपको मुहासें, फुंसी, त्वचा संबंधी रोग हो सकते हैं। वर्ष के अंतिम तिमाही से पहले आपको मौसम संबंधी बीमारी का सामना करना पड़ सकता है। गाड़ी चलाते समय ध्यान रखे व्यायाम और योग से आपका स्वास्थ्य सही रहेगा नींद पूरी ले। शरीर को आराम भी जरुरी हैं।

प्रेम संबंध ( Mithun Rashifal 2017 Marriage Life ) :

Mithun Rashifal 2017 के अनुसार इस साल दूसरी तिमाही तक आपके पारिवारिक रिश्ते बहुत अच्छे रहने के संकेत मिलते हैं। अपने साथी से तनाव या विवाद नही रख कर अपने संबंधों में मधुरता लाये। इस साल की तीसरी तिमाही में थोड़ा तनाव हो सकता हैं। इसलिए अपने क्रोध पर काबू रखे इस साल की अंतिम तिमाही में आपको संतान सुख मिल सकता हैं। यदि आप अपने प्यार की तलास में है तो साल के अन्त तक आपकी तलास पूरी हो जाएगी आपको जीवन साथी मिल सकता हैं।

शिक्षा और रोजगार ( Mithun Rashifal 2017 Education aur Business ) :

Mithun Rashifal 2017 के अनुसार वर्ष के शुरूआती में पंचम भाव में केतु की दुर्ष्टि पड़ने के कारण पढाई में विघ्न पड़ेगा। साथ ही राहु की दुर्ष्टि होने के कारण भी पेरशानी का सामना करना पड़ सकता है। पर आपकी कठिन मेहनत का फल आपको जरूर मिलेगा। वर्ष के अंतिम तिमाही में गुरु का गोचर पंचम भाव में होने के कारण आपकी पढाई में सफलता मिलेगी आप नियमित रूप से पढ़ाई पर ध्यान रखे। व्यापार की नजर से आपके लिए 2017 अच्छा रहेगा इस साल के शुरू में आपको आपके काम के हिसाब से लाभ कम मिलेगा। पर इस साल की तीसरी और अंतिम तिमाही में आपको व्यापार में सफलता मिलेगी। इस वर्ष के अन्त में आपके धन प्राप्ति के योग हैं आपके धन में बढ़ोतरी के संकेत हैं।

उपाय ( Mithun Rashifal 2017 anusar Upay ) :

  • बुधवार को गरीब बच्चों में कापी-किताबें बांटें।
  • गाय को पालक खिलाएँ।
  • नियमित रूप से श्रीसूक्तं और लक्ष्मी चालीसा का पाठ करें।
  • गुरूवार को विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें।
  • अधिक से अधिक बाग़वानी करें।

वृषभ राशिफल 2017 ( Vrishabha Rashifal 2017 )

वृषभ राशिफल 2017 ( Vrishabha Rashifal 2017 ) :

वृषभ राशि वाले व्यक्तियों के नाम ई, उ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो से शुरू होते हैं। Vrishabha Rashifal 2017 के अनुसार यह वर्ष आपके लिए आर्थिक रूप से सही रहेगा। आपको संतान की तरफ से कोई शुभ समाचार मिलेगा। शनि के आठवे भाव में गोचर करने से आपके कुछ कार्य देरी से होंगे पर लगातार कार्य और प्रयास करने से आपको सफलता मिलेगी। इस वर्ष की दूसरी तिमाही आपको व्यापार में उन्नति प्रदान करेगी।

शारीरिक स्वास्थ्य ( Vrishabha Rashifal 2017 ke anusar Health ) :

Vrishabha Rashifal 2017 के अनुसार वर्ष के अंतिम तिमाही में शनि का 8 वे भाव में प्रवेश करना भी आपके लिए अच्छा नही रहेगा। इसलिए वर्ष के अंतिम समय में स्वास्थ्य के प्रति आपको ध्यान देना होगा। आप व्यायाम और योग करे और नींद पूरी करे। जिससे आपका स्वास्थ्य सही रहेगा पेट संबंधी बिमारियों से बच कर रहे।

प्रेम संबंध ( Vrishabha Rashifal 2017 Marriage Life ) :

Vrishabha Rashifal 2017 के अनुसार इस वर्ष आपका वैवाहिक जीवन बहुत अच्छा रहेंगा। इस वर्ष की अंतिम तिमाही में कुछ वैवाहिक जीवन में अनबन या वाद-विवाद हो सकता है। इसलिए इससे बच कर रहे इस साल की अंतिम तिमाही में आपके वैवाहिक जीवन की कोई पुराणी अनबन सही होगी। आपको अपने जीवन साथी के साथ अच्छा समय मिलेगा। इस अंतिम तिमाही में ही आपको संतान सुख मिलने के संकेत मिल रहे हैं आप अपने जीवन साथी के स्वास्थ्य का ध्यान रखे।

शिक्षा और रोजगार ( Vrishabha Rashifal 2017 Education aur Business ) :

Vrishabha Rashifal 2017 के अनुसार इस वर्ष आप शिक्षा संबंधी सभी कार्यो में सफलता प्राप्त करेगे। ज्ञान के कारक गुरु पंचम भाव में होने के कारण आपको शिक्षा के क्षेत्र में उन्नति मिलेगी। गुरु की पंचम भाव से नवम भाव में दृष्टी होने के कारण उच्च स्तर की पढाई करने वालो के लिए बहुत ही शुभ संकेत हैं। इस वर्ष की अंतिम तिमाही में शिक्षा के अनुकूल परिणाम नही मिलेंगे इसलिए इस समय आपको पढाई पर ध्यान लगाने की सलाह देते हैं। व्यापार के क्षेत्र में इस साल आपकी राशि का स्वामी शुक्र आपको फायदा पहुचायेगा। आपको पहली और दूसरी तिमाही में व्यापार में उन्नति मिलेगी आपका कार्य अच्छे से चलेगा इस वर्ष की अंतिम तिमाही में आपको अपनी मेहनत के अनुरूप लाभ काम मिलने की सम्भावना हैं। आपको आत्म विश्वास के साथ मेहनत करने की आवश्यकता हैं।

उपाय ( Vrishabha Rashifal 2017 anusar Upay ) :

  • शुक्रवार के दिन धार्मिक स्थान पर खीर बांटे।
  • लक्ष्मी जी की चालीसा व आरती नियमित पढ़े।
  • साधु, सन्यासियों एवं गरीब बच्चों को भोजन कराएँ।
  • छोटी कन्याओं में शुक्रवार को सफेद मिठाई बाटें।
  • सफेद वस्त्रों, इत्र, सफेद चंदन व सुगन्धित पदार्थों का अधिकाधिक प्रयोग करे।

मेष राशिफल 2017 ( Mesh Rashifal 2017 )

मेष राशिफल 2017 ( Mesh Rashifal 2017 ) :

मेष राशि वाले व्यक्तियों के नाम चू, चे, चो, ला, ली, ले, लो, आ से शुरू होते हैं। Mesh Rashifal 2017 के अनुसार आपका यह साल सामान्य रहेगा। परन्तु 2016 से अच्छा रहेगा। वर्ष 2017 शुरू में आपके लिए ज्यादा अच्छा नही रहे लेकिन वर्ष के अन्त में आपको बहुत अच्छे परिणाम देखने को मिलेंगे साल की अंतिम तिमाही में गुरु ग्रह के गोचर से आपके जीवन में अच्छे परिणाम मिलेंगे, साथ ही इस साल के शुरू में शनि की अष्टम ढैय्या आपको परेशान कर सकती हैं, जिससे आपको कार्य में असमंजस और धन का व्यय हो सकता हैं। आपकी कठिन मेहनत और परिश्रम वर्ष के दूसरे भाग में आपको सफलता दिलाएगी।

शारीरिक स्वास्थ्य ( Mesh Rashifal 2017 ke anusar Health ) :

Mesh Rashifal 2017 के अनुसार स्वास्थ्य के मामले में आपको मिला झूला असर देखने को मिलेगा। शनि की दुष्टि होने के कारण मुंख से नीचे और सीने से ऊपर चोट लगाने के आसार बनते हैं।राहु की स्थिति के कारण मानसिक परेशानी व पेट सम्बन्धी परेशानी का सामना करना पद सकता हैं। आपके राशि के स्वामी मंगल की स्थिति जुलाई व् अगस्त में कमजोर होने के कारण परेशानी हो सकती हैं। आप अपने खाने-पीने का ध्यान रखे और क्रोध करने से बचे रहे साथ ही आप शारीरिक शक्ति की बजाय अपनी मानसिक शक्ति का प्रयोग करे।

प्रेम संबंध ( Mesh Rashifal 2017 Marriage Life ) :

Mesh Rashifal 2017 के अनुसार यह साल शादी शुदा लोगो के लिए अच्छा रहेगा मेष राशि के प्रेम भाव का स्वामी शुक्र होने के कारण आपके वैवाहिक जीवन में चली आ रही समस्या का समाधान होगा। आपको अपने जीवन साथी का पूरा सहयोग प्राप्त होगा अपनी भावनाओ को अपने रिश्ते के ऊपर हावी नही होने दे।  क्योंकि इससे कठिनाई का सामना करना पड़ सकता हैं। जो व्यक्ति अपने प्रेम की तलाश में है उनकी खोज साल के अन्त तक पूरी हो जाएगी।

शिक्षा और रोजगार ( Mesh Rashifal 2017 Education aur Business ) :

Mesh Rashifal 2017 के अनुसार यह साल साल के अंतिम तिमाही में गुरु व राहू के गोचर में परिवर्तन करने के बाद आपकी पढाई में बहुत अच्छे संकेत मिलेंगे। प्रतियोगी परीक्षा में भाग लेने वाले जातको के लिए साल की अंतिम तिमाही में सफलता मिल सकती हैं, इसलिए कठिन परिश्रम करते रहे बिजनेस करने वाले जातको के लिए भी साल की अंतिम तिमाही बहुत अच्छी रह सकती हैं।

उपाय ( Mesh Rashifal 2017 anusar Upay ) :

  • आपके लिए शनि, हनुमान व शिवजी की आराधना करना विशेष लाभकारी रहेगा।
  • सूर्य को नियमित जल दें।
  • मंगल व शनिवार के दिन हनुमान जी को गुड़-चने का भोग लगाएँ व उनकी चालीसा तथा आरती पढ़ें।
  • गरीब लोगों की मदद करें।
  • शनिवार को सुन्दरकाण्ड का पाठ करें।

गुर्दे का इलाज ( Kidney Ka Ilaaj in hindi )

गुर्दे का इलाज ( Kidney Ka ilaaj ) :

गुर्दे का इलाज ( Kidney Ka Ilaaj ) : Kidney ka upay in hindi.

  • आहारः प्रारंभ में रोगी को 3-4 दिन का उपवास करायें अथवा मूँग या जौ के पानी पर रखकर लघु आहार करायें। आहार में नमक बिल्कुल न दें या कम दें। नींबू के शर्बत में शहद या ग्लूकोज डालकर 15 दिन तक दिया जा सकता है। चावल की पतली घेंस या राब दी जा सकती है। फिर जैसे-जैसे यूरिया की मात्रा क्रमशः घटती जाय वैसे-वैसे, रोटी, सब्जी,दलिया आदि दिया जा सकता है। मरीज को मूँग का पानी, सहजने का सूप, धमासा या गोक्षुर का पानी चाहे जितना दे सकते हैं। किंतु जब फेफड़ों में पानी का संचय होने लगे तो उसे ज्यादा पानी न दें, पानी की मात्रा घटा दें।
  • विहारः गुर्दे के मरीज को आराम जरूर करायें। सूजन ज्यादा हो अथवा यूरेमिया या मूत्रविष के लक्षण दिखें तो मरीज को पूर्ण शय्या आराम (Complete Bed Rest) करायें। मरीज को थोड़े परम एवं सूखे वातावरण में रखें। हो सके तो पंखे की हवा न खिलायें। तीव्र दर्द में गरम कपड़े पहनायें। गर्म पानी से ही स्नान करायें। थोड़ा गुनगुना पानी पिलायें।
  • औषध-उपचारः गुर्दे के रोगी के लिए कफ एवं वायु का नाश करने वाली चिकित्सा लाभप्रद है। जैसे कि स्वेदन, वाष्पस्नान (Steam Bath), गर्म पानी से कटिस्नान (Tub Bath)।
  • रोगी को आधुनिक तीव्र मूत्रल औषधि न दें क्योंकि लम्बे समय के बाद उससे गुर्दे खराब होते हैं। उसकी अपेक्षा यदि पेशाब में शक्कर हो या पेशाब कम होता हो तो नींबू का रस, सोडा बायकार्ब, श्वेत पर्पटी, चन्द्रप्रभा, शिलाजीत आदि निर्दोष औषधियों या उपयोग करना चाहिए। गंभीर स्थिति में रक्त मोक्षण (शिरा मोक्षण) खूब लाभदायी है किंतु यह चिकित्सा मरीज को अस्पताल में रखकर ही दी जानी चाहिए।
  • सरलता से सर्वत्र उपलब्ध पुनर्नवा नामक वनस्पति का रस, काली मिर्च अथवा त्रिकटु चूर्ण डालकर पीना चाहिए। कुलथी का काढ़ा या सूप पियें। रोज 100 से 200 ग्राम की मात्रा में गोमूत्र पियें। पुनर्नवादि मंडूर, दशमूल, क्वाथ, पुनर्नवारिष्ट, दशमूलारिष्ट, गोक्षुरादि क्वाथ,गोक्षुरादि गूगल, जीवित प्रदावटी आदि का उपयोग दोषों एवं मरीज की स्थिति को देखकर बनना चाहिए।
  • रोज 1-2 गिलास जितना लौहचुंबकीय जल (Magnetic Water) पीने से भी गुर्दे के रोग में लाभ होता है।

आर्थिक समस्या का उपाय ( Aarthika Samasya Ka Upay )

आर्थिक समस्या का उपाय ( Aarthika Samasya Ka Upay ) :

आर्थिक समस्या का उपाय ( Aarthika Samasya Ka Upay ) :

घर में किसी भी प्रकार की आर्थिक समस्या हो तो कीजिये यह छोटा सा उपाय

  • एक नारियल पर चमेली का तेल मिले सिन्दूर से स्वास्तिक का चिन्ह बनायें. कुछ भोग (लड्डू अथवा गुड़ चना) के साथ हनुमान जी के मन्दिर में जाकर उनके चरणों में अर्पित करके ऋणमोचक मंगल स्तोत्र का पाठ करें. तत्काल लाभ प्राप्त होगा.

मकान बनाने के उपाय ( Makan Banane Ke Upay )

मकान बनाने के उपाय ( Makan Banane Ke Upay ) :

मकान बनाने के उपाय ( Makan Banane Ke Upay ) :

  • एक लाल कपडे में छह चुटकी कुमकुम ,6 लौग,9 बिंदिया ,9 मुट्ठी साफ मिट्टी ,और 6 कौड़िया लपेट कर नदी में विसर्जित करें | माता की कृपा से आपको जल्दी ही अपना मकान मिलेगा |
  • एक मिट्टी की कोरी हांड़ी में दूध ,दही ,घी शक्कर ,मिश्री ,कपूर और शहद डाल कर उस हांड़ी के आगे दुर्गा नवार्ण मंत्र का जाप करें और वो हांड़ी किसी नदी या तालाब के किनारे ले जाकर जमीन में दबा दें तो माता की कृपा से शीघ्र ही आपको भूमि और भवन प्राप्त होगा |
  • उस स्थान की थोड़ी मिट्टी लाकर एक कांच की शीशी में उसे डाले उसमे गंगाजल और कपूर कर अपनी पूजा में जौ के ढेर पर स्तापित करें | नवरात्र भर उस शीशी के आगे नवार्ण मंत्र ‘ऐ हों क्ली’ चामुण्डाय विच्चे’ का 5 माला जप करे और जौ में रोज गंगाजल डालें | नवमी के दिन थोड़े से अंकुरित जौ निकाल लें और ले जाकर मनचाही जगह पर डाल दें शेष सामग्री को नदी में डाल दें | आपको मनचाहा घर मिल जायेगा

विधा प्राप्ति के उपाय ( Vidha Prapti Ke Upay )

विधा प्राप्ति के उपाय ( Vidha Prapti Ke Upay ) :

विधा प्राप्ति के उपाय ( Vidha Prapti Ke Upay ) :

  • घर के छोटे बच्चो विधार्थियों से माता दुर्गा को केले का भोग लगवाएं फिर उनमे से कुछ केले दान में दे दें एवं बाकी केलो को प्रसाद के रूप में घर के लोग ग्रहण करें इससे बच्चों की बुद्धि का विकास होता है।
  • चमेली हरश्रृंगार या किसी भी सफ़ेद फूल को ६ लौंग और एक टुकड़े कपूर के साथ ” रुपदेवी सर्वभूतेषु विद्यारुपेण संस्तिथा नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमो नम: ” पढ़ते हुए ५४ आहुतियाँ नित्य माँ दुर्गा के सामने देने से उत्तम विद्या प्राप्त होती है.

गुस्सा आने तनाव होने का उपाय ( Gussa Jyada Aane Tanav Ka Upay )

गुस्सा आने तनाव होने का उपाय ( Gussa Jyada Aane Tanav Ka Upay ) :

गुस्सा ज्यादा आने तथा तनाव अधिक होने का उपाय (Gussa Jyada Aane Tanav Ka Upay) : jyotish upay.

यदि राहू की कोई समस्या हो, तनाव बहुत अधिक रहता हो, क्रोध बहुत अधिक आ रहा हो, बनता काम बिगड़ रहा हो, परेशानियों के कारण नींद न आ रही हो तो तो कीजिये यह उपाय –

  • बुधवार की रात्रि को एक नारियल को अपने पास रखकर सोयें. अगले दिन अर्थात् वीरवार की सुबह वह नारियल कुछ दक्षिणा के साथ गणेश जी के चरणों में अर्पित कर दें. मन्दिर में यथासम्भव 11 या 21 लगाकर दान कर कर दें. हर प्रकार का अमंगल, मंगल में बदल जायेगा .

श्री गणेश चतुर्थी ( Shri Ganesh Chaturthi )

श्री गणेश चतुर्थी ( Shri Ganesh Chaturthi ) :

श्री गणेश चतुर्थी ( Shri Ganesh Chaturthi puja in hindi ) : Shri Ganesh Chaturthi puja kase kare in hindi.

हिन्दू धर्म ग्रंथों के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को भगवान श्रीगणेश का जन्म हुआ था, इसलिए इस दिन को श्री गणेश चतुर्थी उत्सव बनाया जाता हैं  श्री गणेश चतुर्थी को विनायक चतुर्थी, सिद्धिविनायक चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। जो विघ्नों का नाश करने वाले और ऋद्धि-सिद्धि के दाता हैं। इसलिए इन्हें सिद्धि विनायक भगवान भी कहा जाता है। इस साल श्री गणेश चतुर्थी 05 सितंबर 2016, सोमवार को बनाई जाएगी ! इस दिन जो भगवान श्री गणेश जी का शुध्द मन और तन से उपवास, पूजन और दान करता है,  उस व्यक्ति श्री गणेश मनोवांछित फल देते हैं ! गणेश चतुर्थी को गणपति जी का पूजन और उपासना करने से घर में संपन्‍नता, समृद्धि, सौभाग्य और धन का समावेश होता है। Shri Ganesh Chaturthi इस दिन आप श्री गणेश जी की पूजा करने से किसी कामनापूर्ति स्त्री, पुत्र, पौत्र, धन, समृद्धि के लिए या फिर अचानक ही किसी संकट मे पड़ जाना आदि से निवारण काम हो जाते हैं !

श्री गणेश पूजन विधि (Shri Ganesh Chaturthi puja vidhi) :

  • सुबह जल्दी उठकर पहले नित्यादि क्रियाओं से निवृत्त होकर शुद्ध आसन पर बैठकर अपना मुख पूर्व अथवा उत्तर दिशा की तरफ करके करें। सबसे पहले एक ईशान कोण में स्वच्छ जगह पर पाटा अथवा चौकी रख कर उस पर लाल अथवा पीला कपड़ा बिछाते हैं |श्री गणेश जी को ईशाण कोण में स्थापित करें और उनका श्री मुख पश्चिम की ओर रहे।
  • कपड़े पर केले के पत्ते को रख कर अपने सामर्थ्य के अनुसार सोने, चांदी, तांबे, पीतल या मिट्टी से बनी भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। और सभी पूजन सामग्री को एकत्रित कर पुष्प, धूप, दीप, कपूर, रोली, मौली लाल, चंदन, मोदक आदि एकत्रित कर क्रमश: पूजा करें।
  • भगवान श्री गणेश को तुलसी दल व तुलसी पत्र नहीं चढ़ाना चाहिए। पंचामृत से श्री गणेश को स्नान कराएं, उन्हें, गणेशजी की मूर्ति पर सिंदूर चढ़ाएं। उन्हें रक्तवर्ण के पुष्प विशेष प्रिय हैं। Shri Ganesh Chaturthi शुद्ध स्थान से चुनी हुई दूर्वा को धोकर मंत्र बोलते हुए 21 दूर्वा-दल चढ़ाएं! गणेशजी को 21 दूर्वा दल चढ़ाई जाती है। दूर्वा दल चढ़ाते समय नीचे लिखे मंत्रों का जप करें-ऊँ गणाधिपाय नम:   ऊँ उमापुत्राय नम:ऊँ विघ्ननाशनाय नम:   ऊँ विनायकाय नम:ऊँ ईशपुत्राय नम:   ऊँ सर्वसिद्धप्रदाय नम:ऊँ एकदन्ताय नम:   

    ऊँ इभवक्त्राय नम:

    ऊँ मूषकवाहनाय नम:   

    ऊँ कुमारगुरवे नम:  

  • श्री गणेश भगवान को मोदक (लड्डू) अधिक प्रिय होते हैं इसलिए उन्हें देशी घी से बने 21 लड्डुओं का भोग लगाए चाहिए। इनमें से 5 लड्डू मूर्ति के पास चढ़ाएं और 5 ब्राह्मण को प्रदान कर दें। शेष लड्डू प्रसाद रूप में बांट दें। ( पूजन करने के बाद )
  • गणेश चतुर्थी की कथा, गणेश पुराण, गणेश चालीसा, गणेश स्तुति, श्रीगणेश सहस्रनामावली, गणेश जी की आरती, संकटनाशन गणेश स्तोत्र का पाठ करें. और श्री गणेश स्त्रोत से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
  • अंत में गणेश मंत्र ‘ ऊं गणेशाय नम:’ अथवा ‘ऊं गं गणपतये नम: का अपनी श्रद्धा के अनुसार जाप करें।
  • श्रीगणेश सहित प्रभु शिव व गौरी, नन्दी, कार्तिकेय सहित सम्पूर्ण शिव परिवार की पूजा षोड़षोपचार विधि से करना चाहिए।
  • व्रत व पूजा के समय किसी प्रकार का क्रोध व गुस्सा न करें। यह हानिप्रद सिद्ध हो सकता है। Shri Ganesh Chaturthi श्रीगणेश का ध्यान करते हुए शुद्ध व सात्विक चित्त से प्रसन्न रहना चाहिए।
  • शास्त्रानुसार श्रीगणेश की पार्थिव प्रतिमा बनाकर उसे प्राणप्रति‍ष्ठित कर पूजन-अर्चन के बाद विसर्जित कर देने का आख्यान मिलता है। किन्तु भजन-कीर्तन आदि आयोजनों और सांस्कृतिक आयोजनों के कारण भक्त 1, 2, 3, 5, 7, 10 आदि दिनों तक पूजन अर्चन करते हुए प्रतिमा का विसर्जन करते हैं।
  • किसी भी पूजा के उपरांत सभी आवाहित देवताओं की शास्त्रीय विधि से पूजा-अर्चना करने के बाद उनका विसर्जन किया जाता है, किन्तु श्री लक्ष्मी और श्रीगणेश का विसर्जन नहीं किया जाता है। Shri Ganesh Chaturthi इसलिए श्रीगणेश जी की प्रतिमा का विसर्जन करें, किन्तु उन्हें अपने निवास स्थान में श्री लक्ष्मी जी सहित रहने के लिए निमंत्रित करें।
  • पूजा के उपरांत अपराध क्षमा प्रार्थना करें, सभी अतिथि व भक्तों का यथा व्यवहार स्वागत करें।
  • पूजा कराने वाले ब्राह्मण को संतुष्ट कर भोजन कराएं और उन्हें दक्षिणा देने के बाद प्रणाम कर उनका आशीर्वाद प्राप्त कर शाम के समय स्वयं भोजन ग्रहण करें।

घर में कहां करें भगवान गणेश की स्‍थापना :

  1. बाएं तरफ सूंड : आप जिस मूर्ति को घर में स्‍थापित करें, उसकी सूंड बाईं ओर होनी चाहिये, जो उनकी मां गौरी के प्रति उनका प्‍यार दर्शाती है। कई लोग मां गौरी और भगवान गणेश को एक साथ पूजते हैं। लेकिन आप सिर्फ मूर्ति की स्‍थापना से पहले सूंड की दिशा की ओर ध्‍यान दें।
  2. पीठ न दिखें : भगवान गणेश की मूर्ति घर में इस प्रकार स्‍थापित करनी चाहिये कि उनकी पीठ घर के किसी भी कमरे की ओर न हों। माना जाता है कि भगवान की पीठ दिखने से घर में अशांति आती है और समृद्धि चली जाती है। Shri Ganesh Chaturthi भगवान गणेश की पीठ आपके घर के बाहर की ओर दिखना चाहिये।
  3. दक्षिण की ओर न हों: भगवान गणेश की मूर्ति को घर में कभी भी दक्षिण की ओर दिशा करके न स्‍थापित करें। भगवान को पूर्व या पश्चिम की ओर स्‍थापित करने की कोशिश करें। यहां तक कि आपका पूजा का कमरा भी दक्षिण की ओर दिशा में नहीं होना चाहिये।
  4. टॉयलेट : भगवान गणेश को कभी भी उस दीार पर स्‍थापित न करें जो टॉयलेट की दीवार से जुड़ी हुई हों।
  5. चांदी के भगवान : कई परिवार घरों में चांदी के भगवान गणेश स्‍थापित करते हैं। Shri Ganesh Chaturthi अगर आपके भगवान गणेश धातु के हैं, तो इसे उत्‍तर पूर्व या दक्षिण पश्चिम दिशा में स्‍थापित करें।
  6. उत्‍तरपूर्व : आपके घर में जो उत्‍तरपूर्व कोना हों, उसमें भगवान गणेश की मूर्ति स्‍थापित करना सबसे शुभ होता है। अगर आपके घर में इस दिशा का कोना न हों तो परेशान न हों, पूर्व या पश्चिम दिशा में ही स्‍थापित कर लें।
  7. सीढि़यों के नीचे : अगर आप ड्यूप्‍लेक्‍स या बंगले में रहते है, तो कभी भी सीढि़यों के नीचे भगवान की मूर्ति को स्‍थापित न करें, क्‍योंकि सारा दिन सीढि़यों से ऊपर नीचे आते जाते रहते है और धर्म के अनुसार, यह ईश्‍वर का अपमान है। Shri Ganesh Chaturthi वास्‍तु के हिसाब से ऐसा करने से घर में दुर्भाग्‍य आता है।

उपाय / टोटके करने के नियम और समय ( Upay Krne Ke Niyam )

उपाय / टोटके करने के नियम और समय (Totka Upay Krne Ke Niyam ) :

उपाय / टोटके करने के नियम और समय ( Upay Krne Ke Niyam ) : Totka aur Upay karne ka samay aur Niyam.

उपाय करने के अपने नियम हैं । इसलिए उपाय कब और कैसें करें ये निम्न प्रकार से बतलाया गया है । उपाय करने से पहले ” श्री सीताराम दरबार ” श्री हनुमान जी ” श्री दुर्गा माँ ” का ध्यान करते हुए किसी भी उपाय को करें ! किसी भी उपाय को करने के लिए मन में श्रद्धा का होना जरूरी है । पूरे मन से किया गया उपाय पूर्ण फल देता है व अधूरे मन से किया गया उपाय निष्फल रहता है । इसलिए आपको सलाह दी जाती है कि आप कोई भी उपाय करें उसे निष्ठापूर्वक पूरे मन से श्रद्धापूर्वक करें । पूरे मन से व श्रद्धा और आस्था से आप द्वारा किया गया उपाय आपके लिए कल्याणकारी सिद्ध होगा ।

  • 1. उपाय सूर्य निकलने के बाद सूर्य छिपने तक दिन के समय करें, रात के समय उपाय करना कई बार अशुभ फल दे सकता है। केवल चन्द्र ग्रहण का उपाय रात को किया जा सकता है ।
  • 2. उपाय शुरू करने के लिए किसी खास दिन सोमवार या मंगलवार आदि, सक्रांति, अमावस्या या पूर्णिमा आदि का कोई विचार नहीं होगा।
  • 3. आप का कोई खून का संबंधी रिश्तेदार जैसे भाई-बहन, माता-पिता, दादा-दादी, पुत्र-पुत्री आदि में से उपाय कर सकता है जो फलदाई होगा। (Totka Upay Krne Ke Niyam Samay).
  • 4. एक दिन में केवल एक ही उपाय करें, एक दिन में दो उपाय करने से शुभ फल नहीं मिलता या किया हुआ उपाय निष्फल हो सकता है।
  • 5. जो परहेज बताए जाये जैसे मांस-मछली न खावें, मदिरा का सेवन न करें, चाल-चलन ठीक रखें, झूठ न बोलें, जूठन न खावें न खिलावें, नियत में खोट न रखें, परस्त्री-परपुरुष से संबंध न करें, आदि का विशेष ध्यान रखें।
  • 6. जो उपाय जिस समय के लिये लिखा है उसी समय तक करें, आगे यह उपाय बंद कर देवें।
  • 7. यदि किसी कारण उपाय बीच में बंद करना पड़ जाय तो जिस दिन उपाय बन्द करना है उससे एक दिन पहले थोड़े से चावल दूध से धोकर सफेद कपड़े में बांध कर पास रख लें और जब दुवारा उपाय शुरू करना हो वह चावल धर्म स्थान में या चलते पानी में या किसी बाग-बगीचे आदि में गिरा कर उपाय फिर शुरू कर दें। ऐसा करने से उपाय अधूरा नहीं माना जाएगा और पूरा फल मिलेगा। ( Totka Upay Krne Ke Niyam samay).
  • 8. हर उपाय 43 दिन या 43 सप्ताह या 43 मास या 43 वर्ष तक करना होता है, उपाय चलते समय बीच में टूट जाए चाहे 39वां दिन क्यों न हो सब निष्फल हो सकता है या शुभ फल में कमी रह सकती है।
  • 9. जन्म कुण्डली में अशुभ ग्रहों का वर्षफल कुण्डली में उपाय अपने जन्मदिन से लेकर 40-43 दिन के भीतर ही करें ।
  • 10. घर में कोई सूतक (बच्चा जन्म हो) या पातक (कोई मर जाय) हो जाय तो 40 दिन उपाय नहीं करने चाहिये ।
  • 11. बुजुर्गों के रीति -रिवाजों को न तोडें और संस्कार पूरें करें ।

उपाय करते वक़्त निम्न बातों का ध्यान रखे : –

  • 1) एक समय में केवल एक ही उपाय करें ।
  • 2) लाल किताब के सभी उपाय दिन में ही करने चाहिए । अर्थात सूरज उगने के बाद व सूरज डूबने से पहले ।
  • 3) सच्चाई व शुद्ध भोजन पर विशेष ध्यान देना चाहिए। (Totka Upay Krne Ke Niyam samay).
  • 4) किसी भी उपाय के बीच मांस, मदिरा, झूठे वचन, परस्त्री गमन की विशेष मनाही है ।
  • 5) सभी उपाय पूरे विश्वास व श्रद्धा से करें, लाभ अवश्य होगा ।
  • 6) उपाय कम से कम 40 दिन और अधिक से अधिक 43 दिनो तक करें ।
  • 7) उपाय में नागा ना करें यदि किसी करणवश नागा हो तो फिर से प्रारम्भ करें ।
  • 8) उपाय सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक करें । (Totka Upay Krne Ke Niyam)
  • 9) उपाय खून का रिश्तेदार ( भाई, पिता, पुत्र इत्यादि) भी कर सकता है ।
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