Category: वास्तुशास्त्र उपाय और वास्तुदोष

वास्तु अनुसार दिशा ( Vastu Shastra for Bedroom Kitchen toilet )

वास्तु शास्‍त्र के अनुसार दिशाएं (Vastu Shastra for Bedroom Kitchen toilet) :

Vastu Shastra for Bedroom, Kitchen, toilet and home – आपका घर वास्तु शास्त्र के अनुसार बना हुवा हो तो घर में सुख और धन की प्रप्ति होती है। आपके जीवन से परेशानिया दूर रहती हैं। और वैसे भी वास्तु के अनुसार घर बनाना सही रहता है सभी चीजे सही स्थान पर रहती हैं। आजकल लोग वास्तुशास्त्र पर भरोसा करने लगे हैं। और वास्तु शास्त्र के अनुसार मकान बनने लगे हैं। आज हम आपको बताते है की आपके भवन का मुख्य दरवाजा, बैडरूम, पूजा घर, किचन और टॉयलेट किस दिशा (Vastu Shastra for Bedroom, Kitchen, toilet) में होना चाहिए। आपकी तिजोरी और अलमारी कहा होनी चाहिए। वास्तुशास्त्र के उपयोग से घर में शांति बानी रहती हैं।

Vastu Shastra for Bedroom Kitchen

Vastu Shastra for Bedroom, Kitchen, toilet and home gate in hindi :

1. पूर्व दिशा (East direction) :

  • इस दिशा के प्रतिनिधि देवता सूर्य हैं। सूर्य पूर्व से ही उदित होता है।
  • यह दिशा शुभारंभ की दिशा है। भवन के मुख्य दरवाजा को इसी दिशा में बनाने का सुझाव दिया जाता है।
  • इसके पीछे दो तर्क हैं। पहला- दिशा के देवता सूर्य को सत्कार देना और दूसरा वैज्ञानिक तर्क यह है कि पूर्व में मुखय द्वार होने से सूर्य की रोशनी व हवा की उपलब्धता भवन में पर्याप्त मात्रा में रहती है।
  • सुबह के सूरज की पैरा बैंगनी किरणें रात्रि के समय उत्पन्न होने वाले सूक्ष्म जीवाणुओं को खत्म करके घर को ऊर्जावान बनाएं रखती हैं।

2.उत्तर दिशा (North direction) :

  • इस दिशा के प्रतिनिधि देव धन के स्वामी कुबेर हैं।
  • यह दिशा ध्रूव तारे की भी है। आकाश में उत्तर दिशा में स्थित धू्रव तारा स्थायित्व व सुरक्षा का प्रतीक है। यही वजह है कि इस दिशा को समस्त आर्थिक कार्यों के निमित्त उत्तम माना जाता है।
  • भवन का प्रवेश दरवाजा या लिविंग रूम/ बैठक इसी भाग (Vastu Shastra for Bedroom) में बनाने का सुझाव दिया जाता है। भवन के उत्तरी भाग को खुला भी रखा जाता है।
  • भारत उत्तरी अक्षांश पर स्थित है, इसीलिए उत्तरी भाग अधिक प्रकाशमान रहता है। यही वजह है कि उत्तरी भाग को खुला रखने का सुझाव दिया जाता है, जिससे इस स्थान से घर में प्रवेश करने वाला प्रकाश बाधित न हो।

3.उत्तर-पूर्व (North-east direction) :

  • यह दिशा बाकी सभी दिशाओं में सर्वोत्तम दिशा मानी जाती है। 
  • इस कोण पर देवताओं और आध्यात्मिक शक्ति का वास रहता है। इसलिए यह घर का सबसे पवित्र कोना होता है। 
  • भगवान शिव का एक नाम ईशान भी है। चूंकि भगवान शिव का आधिपत्य उत्तर-पूर्व दिशा में होता है ( Vastu Shastra for Pooja Ghar) इसीलिए इस दिशा को ईशान कोण कहा जाता है। 
  • वास्तु शास्त्र के अनुसार उत्तर और पूर्व दिशा शुभ मानी जाती हैं। 
  • इन दोनों दिशाओं के मिलने वाले कोण पर उत्तर-पूर्व क्षेत्र बनता है इसी वजह से यह घर या प्लाट का यह सबसे शुभ तथा ऊर्जा के स्रोत का शक्तिशाली कोना माना जाता है। 
  • यहां दैवी शक्तियां इसलिए भी बढ़ती हैं क्योंकि इस क्षेत्र में देवताओं के गुरु बृहस्पति और मोक्ष कारक केतु का भी वास रहता है।
  • उत्तर व पूर्व दिशाओं के संगम स्थल पर बनने वाला कोण ईशान कोण है।
  • इस दिशा में कूड़ा-कचरा या शौचालय इत्यादि नहीं होना चाहिए।
  • ईशान कोण को खुला रखना चाहिए या इस भाग पर जल स्रोत बनाया जा सकता है।
  • उत्तर-पूर्व दोनों दिशाओं का समग्र प्रभाव ईशान कोण पर पडता है।
  • पूर्व दिशा के प्रभाव से ईशान कोण सुबह के सूरज की रोशनी से प्रकाशमान होता है, तो उत्तर दिशा के कारण इस स्थान पर लंबी अवधि तक प्रकाश की किरणें पड ती हैं।
  • ईशान कोण में जल स्रोत बनाया जाए तो सुबह के सूर्य कि पैरा-बैंगनी किरणें उसे स्वच्छ कर देती हैं।

4.पश्चिम दिशा (West direction) :

  • यह दिशा जल के देवता वरुण की है।
  • सूर्य जब अस्त होता है, तो अंधेरा हमें जीवन और मृत्यु के चक्कर का एहसास कराता है। यह बताता है कि जहां आरंभ है, वहां अंत भी है।
  • शाम के तपते सूरज और इसकी इंफ्रा रेड किरणों का सीधा प्रभाव पश्चिमी भाग पर पड ता है, जिससे यह अधिक गरम हो जाता है। यही वजह है कि इस दिशा को शयन कक्ष के लिए उचित नहीं माना जाता।
  • इस दिशा में शौचालय, बाथरूम, सीढियों अथवा स्टोर रूम (Vastu Shastra for toilet) का निर्माण किया जा सकता है।
  • इस भाग में पेड -पौधे भी लगाए जा सकते हैं।

5.उत्तर- पश्चिम (North West direction) :

  • यह दिशा वायु देवता की है।
  • उत्तर- पश्चिम भाग भी संध्या के सूर्य की तपती रोशनी से प्रभावित रहता है। इसलिए इस स्थान को भी शौचालय, स्टोर रूम, स्नान घर आदी के लिए उपयुक्त बताया गया है।
  • उत्तर-पश्चिम में शौचालय, स्नानघर (Vastu Shastra for toilet) का निर्माण करने से भवन के अन्य हिस्से संध्या के सूर्य की उष्मा से बचे रहते हैं, जबकि यह उष्मा शौचालय एवं स्नानघर को स्वच्छ एवं सूखा रखने में सहायक होती है।

6.दक्षिण दिशा (South direction) :

  • यह दिशा मृत्यु के देवता यमराज की है।
  • दक्षिण दिशा का संबंध हमारे भूतकाल और पितरों से भी है।
  • इस दिशा में अतिथि कक्ष या बच्चों के लिए शयन कक्ष बनाया जा सकता है।
  • दक्षिण दिशा में बॉलकनी या बगीचे जैसे खुले स्थान नहीं होने चाहिएं। इस स्थान को खुला न छोड़ने से यह रात्रि के समय न अधिक गरम रहता है और न ज्यादा ठंडा।
  • यह भाग शयन कक्ष के लिए उत्तम होता है।

7.दक्षिण- पश्चिम (South-west direction) :

  • यह दिशा नैऋुती अर्थात स्थिर लक्ष्मी (धन की देवी) की है।
  • इस दिशा में आलमारी, तिजोरी या गृह स्वामी का शयन कक्ष बनाना चाहिए।
  • इस दिशा में दक्षिण व पश्चिम दिशाओं का मिलन होता है, इसलिए यह दिशा वेंटिलेशन के लिए बेहतर होती है। यही कारण है कि इस दिशा में गृह स्वामी का शयन कक्ष बनाने का सुझाव दिया जाता है।
  • तिजोरी या आलमारी को इस हिस्से की पश्चिमी दीवार में स्थापित करें।

8.दक्षिण-पूर्व (South-east direction) :

  • इस दिशा के प्रतिनिध देव अग्नि हैं।
  • यह दिशा उष्‍मा, जीवनशक्ति और ऊर्जा की दिशा है।
  • रसोईघर (Vastu Shastra for Kitchen) के लिए यह दिशा सर्वोत्तम होती है।
  • सुबह के सूरज की पैराबैंगनी किरणों का प्रत्यक्ष प्रभाव पडने के कारण रसोईघर मक्खी-मच्छर आदी जीवाणुओं से मुक्त रहता है।
  • दक्षिण- पश्चिम यानी वायु की प्रतिनिधि दिशा भी रसोईघर में जलने वाली अग्नि को क्षीण नहीं कर पाती।

वास्‍तु शास्‍त्र के अनुसार प्‍लॉट ( Vastu Shastra for Home )

वास्‍तु शास्‍त्र के अनुसार प्‍लॉट ( Vastu Shastra for Home aur Vastu Tips for Home – Bedroom – Kitchen ) :

Vastu Shastra for Home – क्या आप एक प्लाट खरीदने की सोच रहे हो? तो रुक जाइये इससे पहले वास्‍तु शास्‍त्र के नियम जान लीजिये जिससे आपको आगे चल कर किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

Vastu Shastra for Home

वास्‍तु शास्‍त्र के अनुसार प्‍लॉट ( Vastu Shastra for Home ) :

  1. प्‍लॉट खरीदते समय उस पर खड़े अनुभव करें। यदि‍ आपको सकारात्‍मक अनुभूति‍ हो तो ही वह प्‍लॉट खरीदें अन्‍यथा न खरीदें।
  2. अगर आप बना हुआ मकान खरीद रहें हैं तो पता लगा लें कि‍ वहाँ पहले रह चुका परि‍वार खुशहाल परि‍वार है या नहीं।
  3. दरि‍द्रता या कि‍सी मजबूरी के चलते बेचे जाने वाले मकान या प्‍लॉट को ना ही खरीदें तो बेहतर है। और अगर लेना ही है तो उसमें सावधानी बरतें।
  4. जीर्ण-शीर्ण अवस्‍था वाले भवन न खरीदें।
  5. मकान या प्‍लॉट को खरीदने से पहले जान लें कि‍ वहाँ की भूमि‍ उपजाऊ है या नहीं। अनुपजाऊ भूमि‍ पर भवन बनाना वास्‍तु शास्‍त्र में उचि‍त नहीं माना जाता है।

वास्तु दोष निवारण ( Vastu Shastra aur Vastu Dosh Nivaran Tips )

वास्तु दोष निवारण ( Vastu Shastra aur Vastu Dosh Nivaran ) :

Vastu Shastra aur Vastu Dosh Nivaran Tips in Hindi :

Vastu Dosh Nivaran tips

  1. घर का मुख्य द्वार किसी अन्य के घर के मुख्य द्वार के ठीक सामने न बनाएं ।
  2. घर के आंगन में तुलसी का पौधा लगाएं और आंगन का कुछ भाग मिट्टी वाला भी रखें ।
  3. ईशान कोण किसी भी मकान का मुख कहलाता है । अतः इस कोण को सदैव पवित्र रखना चाहिए ।
  4. रसोई घर मुख्य द्वार के ठीक सामने न बनाएं । ऐसा होने से अतिथियों का आवागमन होता रहता है ।
  5. पूजागृह, शौचालय व रसोईघर पास-पास न (Vastu Shastra Tips) बनवाएं ।
  6. विधुत उपकरण आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व) में रखें ।
  7. घर में टूटे-फूटे बतरन, टूटा दर्पण, टूटी चारपाई न रखें । इनमें दरिद्रता का वास होता है । रात्रि में बर्तन झूठे न रखें ।
  8. दर्पण, वास बेसिन व नल ईशान कोण में रखें.  सैप्टिक टैंक वायव्य कोण या आग्नेय कोण में रखें ।
  9. किसी भी मकान में दरवाजे व खिड़कियां ग्राउण्ड फ्लोर में ही अधिक रखें । उसके बाद प्रथम, दूसरी  मंजिलों में कम करते जाएं ।
  10. बच्चों के अध्ययन की दिशा उत्तर या पूर्व होती है । यदि बच्चे इन दिशाओं की ओर मुंह करके अध्ययन करें तो स्मृति बनी रहती है
  11. घर में पोछा लगाते समय पानी में सांभर नमक या सेंधा नमक डाल लें । इससे कीटाणु पैदा नहीं होंगे ।
  12. कभी भी बीम या शहतीर के नीचे न बैठें । इससे देह पीड़ा (खासकर सिर दर्द) होती है ।
  13. जल निकास उत्तर-पूर्व में (Vastu Dosh Nivaran) रखें ।
  14. यदि घर में घड़ियां हैं और वे ठीक से नहीं चल रही हैं तो उन्हें ठीक करा लें । घड़ी गृह स्वामी के भाग्य को तेज या मंदा करती है ।
  15. पूजागृह व शौचालय सीढ़ियों के नीचे न बनाएं ।
  16. वास्तुदोष निवारण का अतिसुगम उपाय यह है कि घर में श्रीरामचरित-मानस के नौ पाठ अखंड रूप से करवाएं ।
  17. शयन करते समय सिरहाना पूर्व या दक्षिण दिशा की ओर रखने से धन व आयु की बढ़ोत्तरी होती है । उत्तर की ओर सिरहाना रखने से आयु की हानि होती है !
  18. पूर्व की ओर सिरहाना रखने से विधा , दक्षिण की ओर रखने से धन व आयु की बढोत्तरी होती है । उत्तर की ओर सिरहाना रखने से आयु की हानि होती है ।
  19. अन्‍नागार, गौशाला, रसोईघर, गुरू स्थल व पूजागृह जहां हो उसके ऊपर शयनकक्ष न बनाएं । यदि वहां शयनकक्ष होगा तो धन-संपदा का नाश हो (Vastu Dosh Nivaran) जाएगा ।
  20. सवेरे पूर्व दिशा में व रात्रि में पश्‍चिम दिशा में मल-मूत्र विसर्जन करने से आधी सीसी का रोग होता है ।
  21. घर में बड़ी मूर्ति नहीं रखनी चाहिए । यदि मूर्ति रखनी है तो वह एक बित्ते जितनी ही होनी चाहिए । अर्थात बारह अंगुल (उँगलियाँ) जितनी बड़ी हो ।
  22. घर के पूजन कक्ष में किसी भी देवता की एक से अधिक मूर्ति न रखें ।
  23. पूर्व की ओर मुंह करके भोजन करने से आयु, दक्षिण की ओर मुंह करके भोजन करने से प्रेत, पश्‍चिम की ओर मुंह करके भोजन करने से रोग व उत्तर की ओर मुंह करके भोजन करने से धन व आयु की प्राप्ति होती है ।
  24. घर में सात्त्विक प्रवृत्ति के पक्षियों के जोड़े वाला चित्र रखें । इससे परिवार का वातावरण मधुर पूर्ण रहेगा ।
  25. घर के मुख्य द्वार पर नीबू या संतरे का पौधा लगाएं । ये पौधे संपदा बढ़ाने वाले होते हैं ।
  26. घर के आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व) में सिक्‍कों वाला धात्विक कटोरा अर्थात्‌ धातु का कटोरा रखें और उसमें ऐसे सिक्‍के जो मार्ग में पड़े मिले हों डालते जाएं । ऐसा करने से घर में आकस्मिक रूप से धनागम होने (Vastu Dosh Nivaran) लगेगा ।
  27. घर के मुख्य द्वार पर बाहर की ओर पौधे लगाएं !
  28. परिवार के सदस्यों में मधुर पूर्ण भाव बना रहे, इसके लिए सभी सदस्यों का एक हंसमुख सामूहिक चित्र ड्राइंगरूम में लगाना चाहिए ।
  29. घर में झाडू व पोंछा खुले स्थान पर न रखें । खासकर भोजन कक्ष में झाडू नहीं रखनी चाहिए । इससे अन्‍न व धन की हानि होती है ।
  30. रात्रि में झाडू को उलटी करके घर के बाहर मुख्य दीवार के सामने रखने से चोरों को भय नहीं (Vastu Dosh Nivaran) रहता ।
  31. पति-पत्‍नी में मधुर पूर्ण संबंधों के लिए शयनकक्ष के नैऋत्य कोण (दक्षिण-पश्‍चिम) में प्रेम व्यवहर करते पक्षियों का जोड़ा रखना चाहिए !
  32. शौच से निवृत्त होने के बाद शौचालय का द्वार बंद कर दें । यह नकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है ।
  33. दिन में एक समय परिवार के सभी सदस्यों को एक साथ भोजन करना चाहिए । इससे परस्पर संबंधों में मधुर आती है ।

दोहरा खुशी संकेत के लाभ ( Double Happiness Signs )

दोहरा खुशी संकेत के लाभ ( Double Happiness Signs ) :

दोहरा खुशी संकेत के लाभ ( Double Happiness Signs Benefits in Hindi ) :

Double Happiness Signs

  • इस चिन्ह को घर के दक्षिण पश्चिम में लगाने से घर में खुशियों के मौके बढ़ते हैं। इससे विवाह के योग्य लड़के लड़कियों की शीघ्र और अच्छी शादी होने की संभावना प्रबल होती है ।

एजुकेशन टावर के लाभ ( Education Tower Benefits )

मेनडेरियन डक के लाभ ( Mandarin duck benefits )

मेनडेरियन डक के लाभ ( Mandarin duck benefits ) :

मेनडेरियन डक के लाभ ( Mandarin duck benefits in Hindi ) :

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  • कुंवारे लड़के या लड़की की शादी के लिए मेनडेरियन डक का जोड़ा उस लड़के या लड़की के कमरे के दक्षिण पश्चिम भाग में लगाया जाता है,जिससे उनकी शादी जल्दी और अच्छी हो जाए।

मिस्टिक नाट सिम्बल के लाभ ( Symbole Mystique Benefits )

मिस्टिक नाट सिम्बल ( Symbole Mystique Benefits ) :

मिस्टिक नाट सिम्बल के लाभ ( Symbole Mystique Benefits in Hindi ) :

Symbole Mystique Benefits

  • रहस्यमय गांठ अर्थात् जिसका न प्रारंभ पता है न अंत। इस चिन्ह को घर व आफिस की उत्तर दिशा में लगाने से धन व स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।

लव बर्ड्स के लाभ (Benefits Of Lovebirds)

लव बर्ड्स के लाभ (Benefits Of Lovebirds) :

लव बर्ड्स के लाभ ( Benefits Of Lovebirds in hindi ) :

Benefits Of Lovebirds

  • लव बर्ड्स पति-पत्नी के आपसी सम्बन्धों को मधुर बनाने के लिए शयन कक्ष में लगाया जाता है।

क्रिस्टल बाल ( Crystal Ball Benefits )

क्रिस्टल बाल ( Crystal Ball Benefits ) :

क्रिस्टल बाल ( Crystal Ball Benefits ) :

Crystal Ball Benefits Crystal Ball Benefits

  • क्रिस्टल ऊर्जा वर्धक होते हैं। पूर्व दिशा में लगाने से स्वास्थ्य लाभ होता है। उत्तर पश्चिम दिशा में लगाने से परिवार में आपसी प्रेम बढ़ता है। पश्चिम में लगाने से संतान सुख व दक्षिण पश्चिम में लगाने से दाम्पत्य सम्बन्धों में सुधार होता है।

Crystal Ball Benefits

धातु का कछुआ ( feng shui metal turtle )

धातु का कछुआ ( feng shui metal turtle ) :

धातु का कछुआ ( feng shui metal turtle benefits in hindi ) :

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  • धातु का कछुआ आयु को बढ़ाने वाला व धन समृद्धि देने वाला है। इसे भगवान विष्णु का कच्छप अवतार माना गया है।इसे घर में ऐसे रखते है की यह घर के अन्दर आता नज़र आए। इसकी स्थापना से घर के सदस्यों का रोगों से बचाव होता है ।

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