मासिक-धर्म रोग के उपाय (Ayurvedic Remedy For Menstrual Disorders)

मासिक-धर्म रोग के उपाय (Ayurvedic Remedy For Menstrual Disorders) :

मासिक-धर्म रोग के उपाय (Ayurvedic Remedy For Menstrual Disorders) : Masik dharm rog ke upay, Masik dharm ka ilaj, Ayurvedic Remedy For Menstrual Disorders in hindi.

मासिक-धर्म संबन्धी रोग के प्रकार :

  • एमेनोरिया : यदि  किसी लड़की को 16 वर्ष की आयु तक मासिकधर्म शुरू न हो तो उसे एमेनोरिया रोग कहते हैं। यदि एक बार मासिकधर्म शुरू हो जाए और फिर बंद हो जाए तो उसे सेकेन्डरी एमेनोरिया कहते हैं।
  • डिस्मेनोरिया : इस प्रकार के मासिकधर्म में जब मासिकधर्म शुरू होता है तो उससे कुछ समय पहले स्त्री के पेट में दर्द होना शुरू हो जाता है।
  • मेट्रोरेजिया : इस रोग के कारण स्त्री को मासिकधर्म सही समय पर नहीं आता है जिसे अनियमित मासिकधर्म कहते हैं।
  • मैनोरेजिया : इस रोग में जब स्त्री का मासिकधर्म शुरू होता है तो उसे नियमित दिनों से अधिक दिनों तक रक्तस्राव होता रहता है।
  • हाईपरमैनोरिया : इस मासिकधर्म में मासिकधर्म तो नियमित होता है लेकिन मासिकधर्म में सामान्य दिनों में ही बहुत अधिक रक्तस्राव होता है। Ayurvedic Remedy For Menstrual Disorders.
  • पोलिमेनोरिया : इस प्रकार का मासिकधर्म स्त्री को 21 दिन से भी कम के अंतरराल पर आता है।
  • मिनोमेट्रोरेजिया : इस प्रकार का मासिकधर्म अनियमित रूप में होता है और इसमें रोगी स्त्री को अधिक रक्तस्राव होता है तथा यह सामान्य से अधिक दिनों तक चलता रहता है।
  • हाइपोमैनोरिया : इस प्रकार का मासिकधर्म सामान्य दिनों तक होता है लेकिन इसमे रक्तस्राव कम होता है।
  • पोस्ट मेनोपाजुअल ब्लीडिंग : इस प्रकार के मासिकधर्म में स्त्रियों को रजोनिवृति (मासिकधर्म का बंद होना) के बाद रक्तस्राव होना शुरू हो जाता है।
  • ब्रेक-थ्रो ब्लीडिंग : इस रोग में स्त्रियों को 2 मासिकधर्मों अर्थात पहला मासिकधर्म समाप्त होने के और दूसरा मासिकधर्म शुरू होने के बीच में रक्तस्राव होता है। यह रोग गर्भनिरोधक गोलियां खाने की वजह से भी हो सकता है।
  • प्री मेन्स्ट्रअल सिन्ड्रोम : यह रोग लगभग 40 प्रतिशत स्त्रियों में पाया जाता है। इस रोग के लक्षण इस प्रकार हैं- सिर में दर्द होना, जी मिचलाना, गुस्सा, थकान, पेट में गैस बनना, कमर में दर्द, अधिक तनाव तथा हाथ-पैरों में सूजन आदि।

मासिकधर्म संबन्धी रोग होने के कारण :

  1. स्त्रियों में मासिकधर्म से संबन्धित रोग गलत तरीके से खान-पान के कारण होता है।
  2. मासिकधर्म शुरू होने पर संभोगक्रिया करने के कारण स्त्रियों को मासिकधर्म संबन्धित रोग हो जाते हैं।
  3. मासिकधर्म के समय कब्ज रहने के कारण भी स्त्रियों को मासिकधर्म संबन्धित रोग हो सकते हैं।
  4. किसी स्त्री की यौन उत्तेजना शांत न होने के कारण भी उसे मासिकधर्म संबन्धित रोग हो सकते हैं।
  5. दूषित पानी का सेवन करने के कारण भी स्त्रियों में मासिकधर्म संबन्धित रोग हो सकते हैं।
  6. स्त्रियों के स्नायु में अधिक कमजोरी आने के कारण भी मासिकधर्म संबन्धित रोग स्त्रियों को हो सकते हैं।
  7. स्त्रियों में हारर्मोन्स संबन्धित रोग हो जाने के कारण भी उसे मासिकधर्म संबन्धित रोग हो सकते हैं। Ayurvedic Remedy For Menstrual Disorders.
  8. स्त्रियों की जननेन्द्रियों में किसी तरह का रोग हो जाने के कारण भी यह रोग हो सकता है।
  9. अधिक मानसिक तनाव तथा अन्य रोगों के कारण भी यह रोग स्त्रियों को हो सकता है।

Updated: August 17, 2016 — 4:47 am

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Ayurvedic Solution © 2016 Ayurvedic Solution
Copy Protected by Chetan's WP-Copyprotect.